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Sand Mining: चंबल नदी में अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर अब तकनीक के जरिए सख्त और समन्वित कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के अधिकारियों ने मंगलवार को मुरैना में आयोजित अंतरराज्यीय माइनिंग टास्क फोर्स की बैठक में इस समस्या से निपटने के लिए एक संयुक्त कार्ययोजना तैयार की। इस योजना के तहत चंबल के 16 संवेदनशील घाटों पर नई चौकियां स्थापित की जाएंगी और वहां हाईटेक निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा।
बैठक में तय किया गया कि घाटों, पुलों और सीमा क्षेत्रों में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों की रेंज लगभग पांच किलोमीटर तक होगी, जिससे बड़े दायरे में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। सबसे अहम बात यह है कि इन कैमरों का डेटा तीनों राज्यों के अधिकारियों के बीच रियल टाइम में शेयर किया जाएगा, ताकि किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना मिलते ही तत्काल संयुक्त कार्रवाई की जा सके।
अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केवल सीसीटीवी निगरानी ही नहीं, बल्कि ड्रोन कैमरे, नाइट विजन कैमरे, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और वाई-फाई आधारित सर्विलांस तंत्र भी विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा संयुक्त चेकपोस्ट और नियंत्रण कक्ष भी बनाए जाएंगे, जिससे पुलिस, वन विभाग और खनन विभाग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके। अधिकारियों का मानना है कि तकनीक आधारित यह निगरानी तंत्र चंबल क्षेत्र में सक्रिय रेत माफियाओं की गतिविधियों पर लगाम लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एसपी धर्मराज मीणा ने बताया कि चंबल क्षेत्र में कुल 16 चेकपोस्ट विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 10 मुरैना जिले में स्थापित होंगे। एसपी धर्मराज मीणा ने बताया कि चंबल क्षेत्र में कुल 16 चेकपोस्ट विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 10 मुरैना जिले में स्थापित होंगे। इन सभी चेकपोस्टों को वायरलेस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि पुलिस और वन विभाग के अधिकारी आपस में तुरंत संवाद कर सकें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर फौरन कार्रवाई हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि घाटों पर बने अवैध रेत डंपों को लगातार नष्ट किया जा रहा है और आने वाले समय में अंतरराज्यीय संयुक्त कार्रवाई को और तेज किया जाएगा। इस नई कार्ययोजना से चंबल क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार पर चौतरफा शिकंजा कसने की उम्मीद है।
Updated on:
24 Jun 2026 01:56 am
Published on:
24 Jun 2026 01:56 am
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