
ममता बनर्जी (फोटो-IANS)
APCC Vice President V Gurunadham Statement: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस इस समय बड़े संकट से गुजर रही है। टीएमसी के 20 बागी लोकसभा सांसद बीजेपी की बजाय नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का रास्ता चुना। TMC में मचे आंतरिक घमासान और सांसदों के सामूहिक पाला बदलने की अटकलों पर अब दूसरे राज्यों से भी बड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के उपाध्यक्ष वी. गुरुनाधम ने विजयवाड़ा में मीडिया से बात करते हुए इस पूरे घटनाक्रम पर एक बड़ा बयान दिया है, जिसने देश की सियासत को गरमा दिया है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष वी. गुरुनाधम ने दावा किया कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी बन चुकी हैं कि तृणमूल कांग्रेस के लगभग 19 से 20 लोकसभा सांसद पाला बदलकर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल हो गए हैं। देश के कड़े दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) और उसके कानूनी दांवपेच पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस कानून में कई तकनीकी खामियां और कमियां मौजूद हैं, जिसका फायदा राजनीतिक दल और सांसद उठाते आए हैं।
गुरुनाधम ने स्पष्ट किया, दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत, यदि किसी पार्टी के भीतर गंभीर मतभेद उभरते हैं, तो चुने हुए जनप्रतिनिधियों का एक बड़ा समूह (दो-तिहाई हिस्सा) उस राजनीतिक दल को छोड़ सकता है, जिसके टिकट पर वे चुनाव जीतकर आए थे। ऐसे में उनकी संसद सदस्यता पर कोई आंच नहीं आती।
उन्होंने आगे कहा कि इन बागी सांसदों का एनसीपीआई (NCPI) की तरफ रुख करना उनका अपना स्वतंत्र निर्णय और लोकतांत्रिक अधिकार है। इस कानूनी और राजनीतिक फैसले को खुद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी भी नहीं रोक सकती हैं। कांग्रेस नेता का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि विपक्ष भी अब टीएमसी के इस संकट को दलबदल विरोधी कानून के दायरे में पूरी तरह संभव मान रहा है।
TMC के 20 बागी सांसदों के नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में जाने के बाद कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बागी सांसदों पर अवसरवादिता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दूर के ढोल सुहावने होते हैं (द ग्रास इज ग्रीनर ऑन द अदर साइड) वाली मानसिकता के चलते ये लोग उस समय साथ छोड़ रहे हैं, जब देश के संविधान की रक्षा के लिए मिलकर लड़ने की जरूरत थी। इन लोगों ने जनता के भरोसे और विचारधारा को एक झटके में छोड़ दिया।
Updated on:
15 Jun 2026 04:35 pm
Published on:
15 Jun 2026 03:59 pm
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