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Arrah Lok Sabha: बाबू साहब और पिछड़ों की लड़ाई लोकसभा चुनाव तक आई, जानें बिहार के इस बड़े गढ़ में किसी होगी जीत

Arrah Lok Sabha Election: अगड़ों और पिछड़ों के लिए अगड़ों का संघर्ष, आरा संसदीय क्षेत्रः भाजपा प्रत्याशी का सीधा मुकाबला भाकपा माले के उम्मीदवार के साथ, पढ़ें आरा (बिहार) से राजेश शर्मा की स्पेशल रिपोर्ट..

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देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम 1857 के बलिदानी नायक कुंवर सिंह की भूमि आरा में इस बार भी भाजपा के आरके सिंह का भाकपा माले के सुदामा प्रसाद के साथ सीधा संघर्ष है। जाति और वर्ग के सहारे चुनाव लड़ रहे दोनों ही मुख्य प्रत्याशियों में आरके सिंह क्षेत्र में विकास कार्य करवाने के चलते भारी नजर आ रहे हैं। सिंह तीसरी बार जीत जाते हैं तो वे पहले सांसद होंगे जो इस क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व करेंगे। दूसरी ओर भाकपा माले के तरारी विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुदामा प्रसाद की छवि आम आदमी के लिए संघर्ष करने वाले की है। सुदामा प्रसाद वैश्य जाति से हैं और वे पिछड़ों के साथ ही वैश्य जाति के वोटों को आकर्षित करने में कामयाब हो जाते हैं तो आरके सिंह के लिए समस्या उत्पन्न कर सकते हैं।

क्षेत्र की राजनीति और विकास के हालात

कभी नक्सल और जातीय सेनाओं के गढ़ रहे आरा जिले को वामपंथियों का गढ़ माना जाता है। पहले आए दिन भूमि सेनाओं के बीच खूनखराबा होता रहता था लेकिन अब ऐसी घटनाओं में कमी आई है। आजादी के इतने बरसों बाद भी यह क्षेत्र घोर जातिवादी है। कुल 14 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। अगड़ों और पिछड़ों के बीच ही चुनाव होता है। हालांकि इस क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विकास के बाद युवा देश के दूसरे बड़े शहरों में काम करने लगे हैं जिससे उनके सोचने का तरीका बदला है लेकिन यहां पर युवाओं में चरस, गांजे सहित दूसरे नशों का प्रसार हो रहा है। 1857 के नायक कुंवर सिंह के किले की मरम्मत सहित अन्य विकास हुआ है। कोईलबर सिक्स लेन, आरा से बक्सर के बीच फोरलेन सडक़, बिजली की बीस घंटे से अधिक आपूर्ति, मेडिकल कॉलेज आने के कारण क्षेत्र की कायापलट हुई है। कोईलबर जैसा सिक्स लेन बनाने की अन्य सडक़ों की मांग हो रही है। सोन नहर को पक्का करने का काम हुआ है। रमना मैदान को संवारा है लेकिन क्षेत्र में अपराधों पर अंकुश नहीं लग पाया है। हाइवे पर ट्रकों की रेलमपेल के कारण लोग परेशान हैं।


आरके सिंह 1975 कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। 1990 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी की रामरथ यात्रा को रोकने के लिए बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालूप्रसाद यादव ने विशेष अधिकार देकर आरके सिंह को भेजा था। सिंह ने आडवाणी को गिरफ्तार किया था। बाद में सिंह केन्द्र में केन्द्रीय गृह सचिव तक पहुंचे। आरके सिंह ने 2014 में भाकपा माले के श्रीभगवान सिंह और 2019 में भाकपा माले के राजू यादव को पराजित किया था। इस बार सिंह के सामने माले ने तरारी से विधायक रहे सुदामा प्रसाद को उतारा है। सुदामा प्रसाद पर ऊंची जाति के एक जमींदार की हत्या का आरोप था लेकिन बाद में वे सुप्रीम कोर्ट से बरी हो गए। सुदामा प्रसाद की छवि पिछड़ों के हक के लिए लडऩे की रही है और वे आरके सिंह को कड़ी टक्कर देने की कोशिश कर रहे हैं।

मतदाताओं की बातें

आरा के मुख्य बाजार में बात करते हैं तो नकुल कुमार कहते हैं कि यहां पर तो बाबू साहब और पिछड़ों के बीच लड़ाई है। अभी कुछ कहना मुश्किल है। ऑटो चालक मनोरंजन सिंह से बात करते हैं तो कहते हैं कि-यहां पर तो तीन तारा ही हैं यानी भाकपा माले का बोलबाला है। शहर के अंदर घुसकर बात करते हैं तो मालती देवी कहती हैं कि मोदी के आने के बाद सुकून मिला है। सडक़ें अच्छी हो गई हैं और बिजली मिल रही है। ऑटो स्पेयर पार्ट बेचने वाले विकास कुमार सिंह कहते हैं कि आरके सिंह के जीतने के बाद क्षेत्र के हालात बदले हैं। पहले यहां पर जाति का ही बोलबाला था लेकिन अब काम देखकर वोट दे रहे हैं।

जगदीशपुर में लोग कुंवरसिंह के किले के रखरखाव को लेकर खुश हैं लेकिन पिछले दिनों कुंवर सिंह के परिवार के साथ हुए हादसे के बाद सरकार के रुख से नाराज हैं। महिलाएं फ्री के अनाज को लेकर बात करती हैं। कुछ परिवारों के नाम योजना से गायब हो गए हैं तो कहती हैं कि बाबू लोगों को कहेंगी तो नाम फिर से जुड़ जाएगा।

महिलाओं के मोदी के प्रति झुकाव को कोईलबर में राजेन्द्र यादव भी स्वीकार करते हैं। वे कहते हैं कि यादव माले की तरफ है लेकिन महिलाओं का मत मोदी को जा सकता है। क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा हो चुकी है। तेजस्वी सहित अन्य नेताओं ने भी सभाएं कर चुनाव प्रचार में तेजी लाने का प्रयास किया है। अगिगांव में युवा रोजगार की बात करते हैं। क्षेत्र में थडिय़ों पर लोग सरेआम गांजे और चरस से भरी सिगरेट पीते नजर आ जाते हैं। एक महिला इस बारे में पूछने पर कहती हैं कि हाइवे आने के बाद क्षेत्र में नशे का प्रसार बढ़ा है। कुछ लोग यह धंधा भी करते हैं। ऐसी बात बताते समय लोग आवाज का स्तर धीमा कर लेते हैं।