
UCC पर भड़के ओवैसी
Asaduddin Owaisi Slams UCC: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात विधानसभा द्वारा हाल ही में पास किए गए यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल की कड़ी आलोचना की है। ओवैसी ने इसे पूरी तरह असंवैधानिक करार दिया और कहा कि यह मुसलमानों के मौलिक अधिकारों, खासकर अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का सीधा उल्लंघन करता है।
हैदराबाद सांसद ओवैसी ने शुक्रवार को अहमदाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'यह सब हिंदू धर्म का हिस्सा है। आप इसे मुसलमानों पर क्यों लागू कर रहे हैं? अगर अब किसी को तलाक लेना है तो उसे व्यभिचार साबित करना होगा और न्यायिक हिरासत में रहना होगा। यह इस्लाम के खिलाफ है।' उन्होंने आरोप लगाया कि बिल मुसलमानों की व्यक्तिगत कानूनी व्यवस्था पर हमला है और इसमें लिव-इन रिलेशनशिप के प्रावधान शादी की पवित्रता को खत्म करते हैं।
ओवैसी ने दावा किया कि गुजरात का UCC बिल उत्तराखंड में पास हुए बिल की लगभग कट-पेस्ट कॉपी है। इसमें हिंदू विवाह अधिनियम और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम को अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर सभी समुदायों पर लागू किया गया है। इसलिए यह वास्तव में ‘यूनिफॉर्म’ नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान के अनुच्छेद 44 में UCC केवल एक निर्देशक सिद्धांत है, मौलिक अधिकार नहीं। संविधान सभा की बहस में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने भी इसे स्वैच्छिक आधार पर रखने की बात कही थी।
गुजरात विधानसभा ने पिछले हफ्ते सात घंटे से ज्यादा की बहस के बाद UCC बिल पास किया था। बिल में शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के लिए धर्म-निरपेक्ष एकसमान कानूनी ढांचा बनाने का प्रावधान है। इसमें शादी और लिव-इन का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, जबरन या धोखे से शादी पर सात साल की सजा, बहुविवाह पर रोक जैसी बातें शामिल हैं। अनुसूचित जनजातियों को इससे छूट दी गई है।
ओवैसी ने गुजरात अशांत क्षेत्र अचल संपत्ति हस्तांतरण निषेध अधिनियम 1991 के संशोधन बिल पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि इसमें खरीदार-विक्रेता के अलावा तीसरे व्यक्ति को भी आपत्ति दर्ज करने का अधिकार दिया गया है, जो कमीशनखोरी को कानूनी बना रहा है। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि अगर गुजरात वाकई शांतिपूर्ण राज्य है, जैसा बीजेपी दावा करती है, तो ऐसे संशोधन की जरूरत ही क्यों पड़ी?
AIMIM प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में 539 उम्मीदवार उतारेगी, जिसमें छह नगर निगम, 29 तालुका पंचायत और 28 जिला पंचायत शामिल हैं।
गुजरात UCC बिल पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। बोर्ड ने इसे असंवैधानिक बताते हुए गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। बोर्ड का कहना है कि बिल अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर मुसलमानों पर बहुसंख्यक सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंड थोपने की कोशिश है। विपक्षी दलों ने भी विधानसभा में बिल के खिलाफ वॉकआउट किया था। सरकार का पक्ष है कि बिल लिंग समानता और आधुनिक कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
Published on:
04 Apr 2026 07:10 pm
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