
BJP में शामिल हुए देबाशीष शर्मा (Photo-IANS)
Debashish Sharma joins BJP: असम में नागांव लोकसभा सीट पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नागांव के पूर्व जिला आयुक्त (DC) देबाशीष शर्मा बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इसके बाद चुनावी निष्पक्षता और प्रशानिक भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में कांग्रेस ने चुनाव आयोग का रुख किया है।
कांग्रेस ने देबाशीष शर्मा को लेकर प्रशासनिक अनियमितताओं और उनके संभावित राजनीतिक भविष्य से जुड़े सवाल उठाते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
वहीं अब बीजेपी में शामिल होने के बाद देबाशीष को लेकर अटकलें तेज हो गई है कि पार्टी उन्हें नागांव लोकसभा उपचुनाव में अपना उम्मीदवार बना सकती है। हालांकि अभी तक बीजेपी ने अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया है।
बता दें कि नागांव सीट पर उपचुनाव कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद हो रहा है। बोरदोलोई ने विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। वह नागांव सीट से दो बार सांसद रह चुके हैं।
असम बीजेपी अध्यक्ष सर्बानंद सोनोवाल ने देबाशीष शर्मा का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से पार्टी का संगठन मजबूत होगा और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ बीजेपी का जुड़ाव बढ़ेगा।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक, शर्मा के पास प्रशासन, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक क्षेत्र का अनुभव है। उन्होंने कहा कि शर्मा का प्रशासनिक अनुभव, लोगों से जुड़ाव और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता पार्टी में नई ऊर्जा और मजबूती लाएगी।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि देबाशीष शर्मा पार्टी में शामिल होने से पहले टिकट की मांग लेकर नहीं आए थे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर शर्मा अब नागांव से चुनाव लड़ने की इच्छा जताते हैं या नागांव के लोग उनके नाम की मांग करते हैं, तो पार्टी का प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व इस पर विचार करेगा।
उन्होंने बताया कि पार्टी के पास संभावित उम्मीदवारों का एक पैनल पहले से मौजूद है और आगामी चुनाव को लेकर चर्चा चल रही है।
कांग्रेस ने देबाशीष शर्मा के बीजेपी में शामिल होने के बाद उनकी पूर्व प्रशासनिक भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। असम कांग्रेस के उपाध्यक्ष आरपी शर्मा ने उनके इस्तीफे को आगामी उपचुनाव के संदर्भ में चौंकाने वाला बताया।
आरपी शर्मा ने मीडिया में आई उन खबरों का भी हवाला दिया, जिनमें दावा किया गया था कि देबाशीष शर्मा को चुनावी राजनीति में आने और उपचुनाव से पहले जमीनी स्तर पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत आरोप नहीं, बल्कि मीडिया रिपोर्टों में सामने आई जानकारी है।
कांग्रेस नेता ने 15वें वित्त आयोग के तहत जारी धनराशि को लेकर कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए और मामले की जांच के साथ FIR दर्ज करने की मांग की।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या पूर्व IAS अधिकारी को उपचुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग से नामांकन स्वीकार किए जाने से पहले पूरे मामले की जांच करने की मांग की।
इससे पहले कांग्रेस के धुबरी लोकसभा सांसद रकीबुल हुसैन ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी। उन्होंने नागांव के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) देबाशीष शर्मा के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच की मांग की थी।
4 सितंबर को चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र में हुसैन ने 26 अगस्त, 30 अगस्त, 3 सितंबर और 4 सितंबर को दी गई शिकायतों का हवाला देते हुए शर्मा की कथित राजनीतिक निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
उन्होंने मांग की कि मामले की जांच पूरी होने तक शर्मा को उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों से मुक्त न किया जाए। साथ ही, जिला निर्वाचन अधिकारी के तौर पर शर्मा द्वारा लिए गए चुनाव संबंधी फैसलों, निर्देशों और कार्रवाई की भी समीक्षा करने की मांग की गई।
नागांव लोकसभा सीट के लिए 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को की जाएगी। उपचुनाव से पहले देबाशीष शर्मा का बीजेपी में शामिल होना अब चुनावी राजनीति के साथ-साथ प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर भी बड़ा मुद्दा बन गया है।
Updated on:
9 Sep 2026, 4:01 PM IST
Published on:
9 Sep 2026, 4:01 PM IST
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