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Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary : पहली बार संयुक्त राष्ट्र में किसी भारतीय PM ने किया था ये काम, आज भी नहीं भूला पूरा हिंदुस्तान

Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary : अटल बिहारी बाजपेयाी तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे। उनके कार्यकाल में ही पोखरण परमाणु परीक्षण हुआ और स्वर्णिम चतुर्भुज योजना शुरू की।

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Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary :  अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के ऐसे नेता थे, जिन्होंने अपनी सादगी, विनम्रता और दूरदर्शिता के साथ देश को नई दिशा दी। अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। उन्होंने तीन बार प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया। वे न केवल एक कुशल नेता थे, बल्कि एक कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता भी थे। उनके नेतृत्व में भारत ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं, जिनमें पोखरण परमाणु परीक्षण और सडक़ों के विकास की स्वर्णिम चतुर्भुज योजना प्रमुख हैं। अटल जी की खासियत थी कि वे अपने विरोधियों का भी सम्मान करते थे और राजनीति में मर्यादा का पालन करते थे। उनके भाषणों में गहराई, संवेदना और प्रेरणा की झलक मिलती थी। वे मानते थे कि राजनीति केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि सेवा के लिए होनी चाहिए।

हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाई

जब 1977 में जनता पार्टी सरकार बनी, तब अटल बिहारी वाजपेयी को मोरारजी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री बनाया गया। 4 अक्टूबर, 1977, वो तारीख जब वाजपेयी जी भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के 32वें सत्र में पहुंचे तो उन्होंने तय किया कि वो हिंदी में महासभा को संबोधित करेंगे और उन्होंने हिंदी में भाषण दिया। यह पहली बार था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दिया। उन्होंने गर्व के साथ अपनी मातृभाषा में भारत की बात दुनिया के सामने रखी। इस घटना ने हिंदी को एक वैश्विक पहचान दी और अटल जी का भाषण कला की दुनिया ने सराहना की।

कविता और साहित्य प्रेम

अटल जी एक कुशल राजनेता होने के साथ-साथ एक उत्कृष्ट कवि भी थे। उनकी कविताओं में देशभक्ति, मानवता और प्रेम की झलक मिलती है। उनकी रचनाएं 'मेरी इक्यावन कविताएं' और 'मौत से ठन गई ने उन्हें एक अद्वितीय साहित्यकार के रूप में भी स्थापित किया।

करगिल युद्ध और कूटनीतिक दृष्टिकोण

1999 में हुए करगिल युद्ध के दौरान, अटल जी ने अपने धैर्य और कूटनीति से भारत को न केवल युद्ध में विजय दिलाई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत की स्थिति को मजबूत किया। उन्होंने पाकिस्तान के साथ शांति प्रयासों को भी निरंतर बनाए रखा।

पद्म विभूषण और भारत रत्न से सम्मानित

उनके महान योगदान को मान्यता देते हुए, उन्हें 1992 में पद्म विभूषण और 2015 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनकी नीतियों और दृष्टिकोण ने भारतीय राजनीति में एक नई दिशा दी।

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