
Kangana Ranaut Baba Ramdev (Photo-ANI)
Baba Ramdev on Kangana Ranaut: हरिद्वार। योग गुरु बाबा रामदेव ने रविवार को हरिद्वार में मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा सांसद कंगना रनौत से जुड़े विवाद पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस देश के लोग जानते हैं कि स्वामी रामदेव कौन हैं और उनका क्या योगदान रहा है। इसलिए, मैं ऐसे (कंगना रनौत) ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। मैं विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता।
वहीं, योग गुरु स्वामी रामदेव ने 'एक देश, एक चुनाव' का समर्थन करते हुए कहा कि इससे शिक्षा में सुधार होगा और विकास की गति बढ़ेगी। लोकतंत्र को बाधाओं का बंधक नहीं बनने देना चाहिए। 'एक देश, एक चुनाव' से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि चुनाव पूरे साल चलते रहते हैं, हर कुछ महीनों में कोई न कोई चुनाव होता ही रहता है। सड़कों और संसद में हंगामा और व्यवधान पैदा करके, कुछ लोगों को लगता है कि वे लोकतंत्र को बंधक बना सकते हैं। लेकिन कोई भी लोकतंत्र को बंधक नहीं बना सकता।
रामदेव ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित से समझौता नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है, लेकिन मैं चाहता हूं कि भारत 2040 तक ही विकसित राष्ट्र बन जाए। योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा प्रणाली, अर्थव्यवस्था, कृषि और लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं में सुधार की जरूरत है। सरकार इन क्षेत्रों में काम कर रही है और भविष्य में भी काम जारी रहेगा। हालांकि, कुछ लोगों को लगता है कि देश में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। वे तो पांच, सात और दस साल के बच्चों को भी विरोध-प्रदर्शनों में शामिल कर रहे हैं, उनसे पुलिस थानों को घेरने, एसपी और जिला मजिस्ट्रेट का घेराव करने और सड़कों पर खड़े होने के लिए कह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को सड़क और संसद में हंगामा कर बंधक बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे नहीं करना चाहिए। यदि किसी के साथ अन्याय हो रहा है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं।
वंदे मातरम् को लेकर बाबा रामदेव ने कहा कि हम भारत माता को दुर्गा और लक्ष्मी के रूप में मानते हैं। यही हमारी आस्था, हमारा ज्ञान, हमारा मंदिर और हमें सुरक्षा व शक्ति देने वाली हैं। वह हमारे लिए सर्वोच्च हैं और हमारी भक्ति व आकांक्षा का परम केंद्र हैं। जो लोग 'वंदे मातरम्' में देवियों, देवताओं, मठों या मंदिरों का जिक्र देखते हैं, वे मेरी नजर में हमारी संस्कृत और संस्कृति से कटे हुए लगते हैं। उन्हें संस्कृत का थोड़ा और अध्ययन करना चाहिए और इसके अर्थ को बेहतर ढंग से समझना चाहिए। हमारे लिए भारत माता ही हमारा ज्ञान, हमारी आस्था, हमारा मंदिर, हमारी पूजा, हमारा कर्तव्य, हमारा उद्देश्य, हमारी मंजिल, हमारा धर्म और हमारा सब कुछ हैं।
Updated on:
23 Aug 2026 03:35 pm
Published on:
23 Aug 2026 03:35 pm
