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Bank Locker Rules: लॉकर में रखे लाखों रुपए चट कर गई दीमक, अब कौन करेगा भरपाई? जानिए क्या कहते है नियम

Bank Locker: दक्षिण कन्नड़ जिले में उल्लाल के कोटेकार स्थित एक राष्ट्रीय बैंक के लॉकर में रखे गए 8 लाख रुपए को दीमक लग गई। पैसा गंवाने वाले ग्राहक ने बैंक के केन्द्रीय कार्यालय में इसकी शिकायत की है।

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Bank Locker Rules: बैंक लॉकर का इस्तेमाल विभिन्न वर्गों के लोग अपने कीमती सामान जैसे कि दस्तावेज, पैसे, सोने, चांदी, हीरे और अन्य कीमती धातुओं से बने आभूषण सुरक्षित रखने के लिए करते हैं। लोगों के सामान को सुरक्षित रखने के लिए बैंक चोरी के जोखिम को कम करने के लिए बेहतर सुरक्षा उपाय प्रदान करते हैं। कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में उल्लाल के कोटेकार से बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। उल्लाल के कोटेकार स्थित एक राष्ट्रीय बैंक के लॉकर में रखे गए 8 लाख रुपए को दीमक लग गई। यह पहली बार नहीं है, इस प्रकार की कई घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी है। बैंक लॉकर से चीजें गायब हो जाती है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होता है। क्या बैंक को हर्जाना भरना पड़ता है। आइए जानते है क्या है आरबीआई के नियम।

लाखों रुपये चट कर गई दीमक

छह माह पहले उपभोक्ता ने लॉकर में 8 लाख रुपए की राशि रखी थी। लॉकर के मालिक ने जब उसे खोला तो वो भी हैरान रह गया। लॉकर तक बारिश का पानी भी पहुंचने का अंदेशा, जिससे उसमें रखे नोट काले-धूसरित हो गए तथा ज्यादातर को दीमक लग गई। नोट टुकड़ों में मिले हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि आरबीआई के नियम अनुसार पैसों को बैंक लॉकर में नहीं रख सकते। पैसा गंवाने वाले ग्राहक ने बैंक के केन्द्रीय कार्यालय में इसकी शिकायत की है। बैंक अब आरबीआई गाइडलाइंस के तहत कार्रवाई का भरोसा दे रहा है।

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क्या है आरबीआई नियम

भारतीय रिजर्व बैंक ने 2022 में सेफ डिपॉजिट लॉकर (Safe Deposit Locker) को लेकर नए नियम जारी किया है। नए नियमों के तहत बैंकों को खाली लॉकरों और वेटिंग लिस्ट दिखाना होग। इसके साथ ही बैंकों के पास लॉकर के लिए कस्टमर्स से अधिकतम तीन साल का किराया लेने का अधिकार होगा। इस समय अवधि के दौरान किसी ग्राहक को नुकसान होता है तो बैंक को उसकी भरपाई करनी होगी।

जिम्मेदारियों से नहीं बच सकेंगे बैंक

केंद्रीय बैंक के संशोधित नियमों के अनुसार, बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा कराए गए लॉकर एग्रीमेंट में कोई अनुचित शर्त नहीं जोड़ी जाए। जिससे ग्राहक को नुकसान होने पर बैंक आसानी से किनारा कर सके। अक्सर कई बार यह देखने को मिला है कि बैंक एग्रीमेंट के शर्तों का हवाला देते हुए अपनी जिम्मेदारियों से बच जाता है।

बैंक को करना होता है भुगतान

आरबीआई के नियम कहते है कि बैंक की लापरवाही की वजह लॉकर में रखे सामान के किसी भी नुकसान के मामले में बैंक को भुगतान करना होगा। बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे परिसर की सुरक्षा के लिए सभी कदम उठाएं, जिसमें लॉकर भी शामिल है। बैंक की जिम्मेदारी है कि नुकसान जैसे— आग, चोरी/डकैती, इमारत का गिरना बैंक के परिसर में उसकी अपनी कमियों, लापरवाही और किसी चूक/कमीशन के कारण नहीं होनी चाहिए।

बैंक लॉकर में रखी जा सकने वाली चीजें

—सुरक्षा के लिए सोने, चांदी, हीरे और अन्य कीमती धातुओं से बने आभूषण, सिक्के और बुलियन (सोने और चांदी की छड़ें) को अक्सर लॉकरों में रखा जाता है।
—कानूनी दस्तावेजों में गोद लेने के कागजात, पावर ऑफ अटॉर्नी दस्तावेज, वसीयत और संपत्ति के दस्तावेज शामिल हैं।
—म्यूचुअल फंड, बांड, शेयर प्रमाण पत्र, कर और बीमा पॉलिसियों से संबंधित दस्तावेज वित्तीय रिकॉर्ड के उदाहरण हैं।

बैंक लॉकर में नहीं रखी जा सकने वाली वस्तुएं

—हथियार, विस्फोटक, ड्रग्स या किसी भी अन्य प्रकार की प्रतिबंधित वस्तु रखना सख्त वर्जित है।
—ऐसे खाद्य पदार्थ और अन्य वस्तुएं जो समय के साथ खराब हो सकती हैं, प्रतिबंधित हैं।
—संक्षारक, रेडियोधर्मी या अन्यथा हानिकारक कोई भी वस्तु लाना वर्जित है।
—चूंकि नकदी को सुरक्षित या बीमा योग्य वस्तु नहीं माना जाता है, इसलिए अधिकांश बैंक इसकी अनुमति नहीं देते हैं।

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