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‘मैं मुसलमानों के लिए कभी काम नहीं करूंगा’, बंगाल में भाजपा MLA रितेश तिवारी का Video वायरल

Bengal MLA Video Viral: पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायक रितेश तिवारी का एक वायरल वीडियो विवादों में है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के लिए काम न करने की बात कही है।

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BJP MLA Video Viral

बंगाल में भाजपा विधायक का वीडियो वायरल (Video Screenshot)

BJP MLA Muslim Vote Controversy: पश्चिम बंगाल में हालिया विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच कोलकाता से सटी काशीपुर-बेलगाछिया विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रितेश तिवारी (Ritesh Tiwari) का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

वायरल वीडियो में क्या?

वायरल हो रहे इस वीडियो में विधायक रितेश तिवारी एक जनसभा को संबोधित करते हुए अपनी चुनावी जीत का जश्न मनाते नजर आते हैं। इसी दौरान वे कथित तौर पर यह कहते हुए सुने जाते हैं कि उन्हें मुस्लिम समुदाय से कोई वोट नहीं मिला, इसलिए वे अगले पांच साल तक उनके लिए कोई काम नहीं करेंगे।

देखें वायरल वीडियो

भोलेनाथ को साक्षी मानकर खाई कसम

वीडियो के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि वे भगवान भोलेनाथ को साक्षी मानकर शपथ लेते हैं कि वे मुस्लिम समुदाय के किसी भी व्यक्ति का काम नहीं करेंगे और न ही किसी सरकारी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगे।

वोट नहीं तो काम नहीं

वायरल बयान में विधायक यह तर्क देते दिखते हैं कि लोकतंत्र में जिन लोगों ने उन्हें वोट दिया है, केवल वही उनके कार्यक्षेत्र के दायरे में आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जो समुदाय उन्हें समर्थन नहीं देता, उनके लिए वे किसी प्रकार की प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे।

सबका साथ, सबका विकास

भारतीय जनता पार्टी अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के नारे को अपनी प्रमुख नीति के रूप में पेश करती रही है। लेकिन इस कथित वीडियो ने उसी विचारधारा पर बहस छेड़ दी है।

वीडियो में कही हिसाब की बात

वीडियो में विधायक यह भी कहते नजर आते हैं कि भले ही कोई शारीरिक नुकसान या आर्थिक हानि न पहुंचाई जाए, लेकिन वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने हिसाब को संतुलित करेंगे।

वीडियो पर खड़ा हुआ विवाद

इस पूरे मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ इस कथित वीडियो को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों द्वारा कड़ी आलोचना की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ इसे लोकतांत्रिक प्रतिनिधि की संवैधानिक जिम्मेदारियों से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि वीडियो में कही गई बातें सही पाई जाती हैं, तो यह निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के आचरण और उनके कर्तव्यों की समझ पर गंभीर विमर्श को जन्म दे सकती है। फिलहाल, इस कथित बयान को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता दिख रहा है।