इस घटना के बाद बंगाल चुनाव में सुरक्षा और 'गुप्त समझौतों' का मुद्दा एक बड़ा चुनावी हथियार बन गया है। ऐसा माना जा रहा है कि टीएमसी अब अपनी आने वाली हर रैली में इस 'क्या है डील?' वाले मुद्दे को जनता के बीच आक्रामक तरीके से उठाएगी। वहीं, चुनाव आयोग की नजर भी राजनीतिक दलों के इस तरह के तीखे बयानों पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अधीर रंजन चौधरी इस चुनौती का कोई सीधा जवाब देते हैं, अपनी सुरक्षा छोड़ते हैं, या फिर इस मुद्दे को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं।