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BJP में ये हो क्या रहा है! कोई छोड़ रहा पार्टी तो कोई दिखा रहा है आंखें तो किसी के नहीं थम रहे आंसू

Haryana BJP: हरियाणा बीजेपी में पहली सूची जारी होने के बाद से ही बवाल मचा हुआ है। टिकट कटने वाले बीजेपी विधायक या तो पार्टी छोड़ कर जा रहे हैं या फिर पार्टी में ही रह कर नाराजगी का भी खुब इजहार कर रहे हैं।

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Haryana BJP: हरियाणा के चुनावी रण में बीजेपी की पहली सूची के बाद सियासी तपिश पूरे शबाब पर है। 24 घंटे में 20 से अधिक बड़े नेताओं ने पार्टी से किनारा कर लिया है तो वहीं टिकट कटने बाद भी जो पार्टी में बने हुए है वो अब आंख दिखाने लगे है। हरियाणा ओबीसी मोर्चा के नेता और पूर्व मंत्री करण देव कंबोज ने एक बैठक के दौरान पार्टी के कई अन्य सदस्यों के सामने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। तो वहीं पार्टी का टिकट न मिलने पर भाजपा के एक पूर्व विधायक शुक्रवार को एक साक्षात्कार के दौरान फूट-फूट कर रो पड़े।

मुख्यमंत्री से नहीं मिलाया हाथ

दरअसल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पूर्व मंत्री करण देव कंबोज से बात करने आए थे, जो कथित तौर पर पार्टी की उम्मीदवार सूची से बाहर किए जाने से नाराज थे। कंबोज को पार्टी नेताओं की एक पंक्ति से हाथ जोड़कर चलते हुए सभी का अभिवादन किया, मुख्यमंत्री पास पहुँचने से पहले, कंबोज से हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ते हैं। कंबोज आगे देखते हैं, अपने जुड़े हुए हाथों को वापस खींचते हैं और चलते रहते हैं, जबकि सैनी उनका हाथ पकड़ते हैं और उसे थामने की कोशिश करते हैं।

इतना ही नहीं बल्कि कंबोज मुख्यमंत्री के बगल में अपनी सीट पर बैठते हैं, लेकिन उनकी तरफ नहीं देखते। उन्होंने राज्य भाजपा के ओबीसी मोर्चा के प्रमुख पद से भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा, "शायद भाजपा को अब वफादारों की जरूरत नहीं है।" उन्होंने कहा कि पार्टी उन नेताओं को टिकट दे रही है जो एक दिन पहले ही पार्टी में शामिल हुए हैं, जबकि उन लोगों को नजरअंदाज कर रही है जो वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे हैं।

इंटरव्यू में रो पड़े विधायक

वहीं एक इंटरव्यू के दौरान विधायक शशि रंजन परमार से आगामी हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की सूची से उनका नाम बाहर रखे जाने के बारे में जब पूछा तो फफक-फफक कर रोने लगे। परमार राज्य के भिवानी और तोशाम से भाजपा उम्मीदवारी के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे। नेता ने कहा, "मुझे लगा था कि मेरा नाम सूची में होगा..." इससे पहले कि उनका गला भर आए, वे रो पड़े। साक्षात्कारकर्ता नेता को यह कहकर सांत्वना देने की कोशिश करता है कि पार्टी उनकी कीमत देखेगी और उनके निर्वाचन क्षेत्र को भी। लेकिन पूर्व विधायक रोना जारी रखते हैं।

समर्थकों के साथ बैठक में रो पड़ीं विधायक

एक अन्य वीडियो में, वरिष्ठ भाजपा नेता कविता जैन सोनीपत में अपने समर्थकों के साथ बैठक में रो पड़ीं, जब उनका नाम उम्मीदवारों की सूची से हटा दिया गया। "मैंने अपनी बेटी को दो साल से नहीं देखा है, जो एक छात्रावास में रहती है। मैं पिछले पांच सालों से पार्टी के लिए कड़ी मेहनत कर रही हूं। उसने मुझसे घर आने के बारे में पूछा और मैंने उसे चुनाव से पहले घर न आने के लिए कहा," उन्होंने आंसू पोंछते हुए कहा।

"हम पार्टी की कार्रवाइयों से परेशान नहीं हैं, लेकिन हम पार्टी के प्रति अपने समर्पण और 50 साल की सेवा से दुखी हैं। अगर संगठन ने हमें अगला चुनाव न लड़ने और केवल पार्टी के लिए काम करने के लिए कहा होता, तो हम उस निर्देश का पालन करते," उन्होंने अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा।

कुलमिलाकर बीजेपी के लिए चुनाव से पहले सबसे बड़ी चुनौती डैमेज कंट्रोल करने की है। अगर बीजेपी डैमेज कंट्रोल करने में विफल रहती है तो उसके लिए चुनाव में चुनौतियां चट्टान जैसी सामने खड़ी हो सकती है, जिससे पार पाना मुश्किल साबित हो सकता है।