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बाहर न जाए बिहारी: हर पार्टी का वादा- हम रोकेंगे पलायन, हम देंगे रोजगार

गृहमंत्री अमित शाह ने रोहताश जिले के सासाराम विधानसभा मुख्यालय पर बिहार चुनाव की अपनी 37वीं सभा कर पूरी ताकत झोंकी। एनडीए के चुनावी वादों की भरपूर बौछार की।

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पटना

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Ashib Khan

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रतन दवे

Nov 09, 2025

दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को वोटिंग होगी

दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को वोटिंग होगी

बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का प्रचार-प्रसार रविवार को थम गया। मंगलवार को 122 सीटों पर मतदान होगा। दक्षिण बिहार को साधने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने रोहतास जिले के सासाराम विधानसभा मुख्यालय पर बिहार चुनाव की अपनी 37वीं सभा कर एनडीए के पक्ष में पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने एनडीए के चुनावी वादों की झड़ी लगा दी। शाह ने कहा, 'नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं, लालू के बेटे के लिए कोई वैकेंसी नहीं है।' उधर, सासाराम में ही महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे तेजस्वी यादव ने सभा कर दक्षिण के गढ़ को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया।

फिर बड़ा मुद्दा बना पलायन

बिहार विधानसभा चुनाव में पलायन एक बार फिर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। एनडीए, महागठबंधन और जनसुराज- तीनों ही गठबंधन इस मुद्दे को अपने चुनाव अभियान में पूरी तरह भुनाने में जुटे हैं, ताकि बाहर जा रहे बिहारी मतदाताओं की भावनाओं को सीधे छू सकें।

दक्षिण बिहार की 26 सीटों पर, जहां लगभग 75 फीसदी इलाका सिंचाई से वंचित है और स्थायी रोजगार के अवसर सीमित हैं, लोगों में वादों पर भरोसा कम ही दिखता है। वे कहते हैं — 'वादा तो हर बेर होतै, काम कबहूं नै होतै।'

एनडीए का दावा, एक करोड़ रोजगार

नीतीश कुमार और भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सभाओं में बड़े से छोटे नेता तक एक करोड़ रोजगार सृजन, मेगा स्किल सेंटर और आइटी इंडस्ट्री लाने के वादे कर रहे हैं। रोहतास के केन्दुई गांव में धान की फसल काटते फर्स्ट ईयर के छात्र ने कहा, 'हमनी के खेत में साल भर बस दू महीना काम रहै, बाकी आठ महीना रिक्शा चलावत बानी। काम मिल जाई त काम करब, पर वादा ही होत रहे।'

महागठबंधन ने हर परिवार को एक सरकारी नौकरी, संविदाकर्मियों को नियमित करने और महिलाओं को 2500 रुपए मासिक सहायता देने का वादा किया है। जहानाबाद की कोचिंग संस्था में अनिल पासवान कहते हैं, 'प्रशिक्षण तो होते हैं, पर नौकरी कहां है? और एक परिवार को नौकरी का गणित भी समझ नहीं आता।' वहीं जमुई के राकेश यादव का कहना है, 'तेजस्वी ने जो 20 महीने में वादा किया, वो कुछ हद तक निभाया है, इसलिए इस बार उम्मीद है।' जनसुराज पार्टी की ओर से युवा कनक मुखर्जी कहते हैं, 'बिहार अब बाहर नहीं जाएगा’ — यह बात इस बार लोगों के दिल में उतर रही है, शायद कुछ बदले।'

जमीनी हकीकत: दक्षिण बिहार की तस्वीर

नवादा: तेल मिल, आटा चक्की और हैंडीक्राफ्ट इकाइयां बंद हो रहीं

बोधगया: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकास की मांग

जहानाबाद: स्किल ट्रेनिंग सेंटर की ज़रूरत, लोग मजदूरी के लिए कोलकाता जा रहे

मुखदुमपुर: नहरी पानी नहीं, गन्ना मिल बंद

सिकंदरा: बीड़ी मजदूरी घटने से बेरोजगारी और बीमारियां बढ़ीं

जमुई: युवा सेना व खेल क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी में

'वादे ठीक हैं, पर रोडमैप कहां है?'

जमुई में मिले अधिवक्ता सत्यजीत सिन्हा और नरेश पांडेय कहते हैं, 'वादे सुनने में अच्छे लगते हैं, पर इन्हें पूरा कैसे करेंगे — इसका कोई रोडमैप नहीं दिखता।' उनका मानना है कि इस बार वादे उत्साहित करने वाले हैं। 'तेजस्वी ने 20 महीनों में कुछ काम दिखाया, तो भरोसा बढ़ा है। वहीं मोदी का ‘जो मैं कहता हूं, करता हूं’ वाला भरोसा भी असर डालता है। इसलिए इस बार वादों पर पहले से अधिक विश्वास है। लेकिन जब तक बड़ी इंडस्ट्री नहीं आएगी, तब तक स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।'

ई-रिक्शा बनी रोजगार का नया साधन

दक्षिण बिहार में आज रेस्टोरेंट, होटल, चाय ठेला और ‘टोटा’ (ई-रिक्शा) रोजगार का प्रमुख माध्यम बन गए हैं। 13 साल के किशोर से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक टोटा चला रहे हैं। हालांकि इससे ट्रैफिक की समस्या बढ़ी है, लेकिन यह स्थानीय स्तर पर बड़ा रोजगार विकल्प साबित हुआ है।

चुनाव कर्मचारी पहुंचे, आज रवाना होंगे

बिहार चुनाव सम्पन्न कराने के लिए कर्मचारी रविवार को विभिन्न मुख्यालयों में पहुंच गए। सोमवार को मतदान दल रवाना होंगे। गया से सासाराम की रेल यात्रा के दौरान कुछ कर्मचारियों ने बताया — 'हम तो ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) की मांग कर रहे हैं।'

अभी की तस्वीर

गया और बोधगया: धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र

खेती: मक्का, गेहूं, धान, सब्ज़ी और फल लगभग सभी जिलों में

उद्योग: ईंट भट्टा, स्टोन क्रेशर, टाइल्स और सीमेंट — गया, औरंगाबाद में

छोटे व्यवसाय: फर्नीचर, फेब्रिकेशन, इलेक्ट्रिकल रिपेयरिंग — जहानाबाद और नवादा

हैंडलूम व हथकरघा: जमुई क्षेत्र में परंपरागत जीविका का आधार