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बिहार चुनाव: AIMIM की इकलौती सीट दांव पर, क्या अखतरुल ईमान उड़ा पाएंगे ओवैसी की जीत की पतंग

Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव का दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को होगी। इस चरण में AIMIM कितना असर दिखा पाएगी। जानिए...

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अखतरुल ईमान (फोटोःX अकाउंट- @AkhtarulImanMLA)

Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव अब दूसरे फेज में प्रवेश कर चुका है। इस चरण में सीमांचल इलाके में मतदान होना है। यह इलाका मुस्लिम बहुल है। सीमांचल के चार जिलों पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज में 11 नवंबर को वोटिंग होगी। इस इलाके में पिछले विधानसभा चुनाव में AIMIM का प्रदर्शन बेहतर रहा था। AIMIM ने साल 2020 में पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन बाद में पार्टी के चार विधायक टूटकर राजद में जा मिले। इस बार पार्टी के सामने बिहार में अस्तित्व बचाने की चुनौती है। अमौर से विधायक और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखतरुल ईमान को जदयू सबा के जफर और कांग्रेस के जलील मस्तान से कड़ी टक्कर मिल रही है।

70 फीसदी हैं मुस्लिम वोटर

पूर्णिया का अमौर विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल है। यहां करीब 70 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। 24 फीसदी आबादी हिंदुओं की है। यहां कुछ आदिवासी भी हैं। 1952 से अब तक यहां 18 बार चुनाव हुए हैं, सिर्फ एक बार 1977 में जनता पार्टी के चंद्रशेखर झा ने जीत दर्ज की। जबकि, 17 बार मुस्लिम उम्मीदवार जीते हैं। सबसे ज्यादा 6 बार जलील मस्तान ने जीत दर्ज की। सबा जफर को एक बार जीत मिली। अखतरुल ईमान को एक बार जीत मिली है। 2020 में भी इन्हीं तीनों के बीच मुकाबला था, जिसमें अख्तरुल ईमान बाजी मार ले गए। इस बार भी इन्हीं तीनों के बीच मुकाबला है। बिहार में विधायकों के टूटने के बाद AIMIM इस बार कमजोर नजर आ रही है। इससे अखतरुल ईमान की चुनौती बढ़ गई है।

बंगाली मुस्लिम, सुरजापुरी, कुल्हैया, शेरशाह की लामबंदी

मुस्लिम बहुल होने की वजह से यहां धार्मिक धुव्रीकरण नहीं हो पाता है। यहां मुसलमानों में कुल्हैया और सुरजापुरी के बीच वर्चस्व कायम करने की होड़ लगी रही है। ये दोनों ही उपजातियां यहां मजबूत है। AIMIM के अखतरुल ईमान और कांग्रेस के जलील मस्तान सुरजापुरी से ताल्लुक रखते हैं, तो वहीं जदयू के सबा जफर कुल्हैया से आते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुल्हैया की आबादी यहां 1.2 लाख है। यदि कुल्हैया हिंदुओं के साथ गठजोड़ कर लेते हैं तो जदयू के सबा जफर की स्थिति मजबूत हो जाएगी। दूसरी तरफ अगर सुरजापुरी मतों का विभाजन नहीं हुआ और वह किसी एक उम्मीदवार के साथ रहे तो कांटे की लड़ाई हो सकती है।

पहले बीजेपी से बने थे विधायक सबा जफर

सबा जफर का राजनीतिक करियर बीजेपी से शुरू हुआ। 2010 में अमौर सीट से BJP के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उन्होंने तब कांग्रेस के अब्दुल जलील मस्तान को हराया था। 2015 में BJP ने दोबारा टिकट दी, लेकिन वे हार गए। 2020 में JDU की टिकट पर चुनाव लड़ा, इस बार AIMIM के अख्तरुल ईमान ने उन्हें हरा दिया।

कांग्रेस के सीमांचल में कद्दावर नेता हैं अब्दुल जलील मस्तान

62 वर्षीय अब्दुल जलील मस्तान सीमांचल में कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते हैं। वे 1985 से अब तक छह बार विधायक चुने जा चुके हैं। 2020 में तीसरे स्थान पर रहे (31,863 वोट)। इस चुनाव में AIMIM के अख्तरुल इमान जीते।

AIMIM के इकलौते विधायक हैं अखतरुल ईमान

AIMIM पार्टी के अखतरुल ईमान अमौर से विधायक हैं। वह पूर्व में किशनगंज जिले की कोचाधामन सीट से भी विधायक रह चुके हैं। साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में पार्टी ने सीमांचल में अपना गहरा प्रभाव छोड़ा था।

हिस्सेदारी आबादी की तुलना में आधी भी नहीं

बिहार में साल 2022-23 में हुए जातीय सर्वे के हिसाब से 13.07 करोड़ की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 17.7 फीसदी है, लेकिन सभी पार्टियों को मिलाकर भी 17 फीसदी मुस्लिम प्रत्याशी विधायक चुनकर विधानसभा नहीं पहुंचे। 1990 से 2020 तक कुल सीटों में मुस्लिमों की हिस्से क्रमश: 5.55%, 7.09%, 9.25%, 9.87%, 7.81%, 9.87%, 7.81% फीसदी रही। RJD ने अपने 143 कैंडिडेट में से 18 मुस्लिम को टिकट दिया है। कांग्रेस ने इस बार 10 मुस्लिम को टिकट दिया है।