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अमित शाह मुर्दाबाद, भाजपा सरकार मुर्दाबाद जैसे नारे क्यों नहीं लगा सकती जनता? बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस माधव जामदार ने पूछा

Bombay High Court Order: सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और नारे लगाने को आधार बनाकर किसी नागरिक को एक्सटर्न(बाहर) नहीं किया जा सकता। बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अमित शाह मुर्दाबाद, भाजपा सरकार मुर्दाबाद जैसे नारे क्यों नहीं लगा सकती जनता?
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भारत

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Anurag Animesh

Jul 02, 2026

High Court

बॉम्बे हाई कोर्ट(फोटो-ANI)

Bombay High Court: कोर्ट अलग-अलग समय पर कई जरुरी मुद्दों पर टिपण्णी करती है। जो जरुरी और अहम भी होती है। ऐसी ही एक टिप्पणी बॉम्बे हाईकोर्ट के एक जज ने की है। लाइव लॉ वेबसाइट के मुताबिक बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति माधव जमदार ने गुरूवार को टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार के फैसलों का विरोध करना किसी नागरिक को किसी इलाके से बाहर करने का आधार नहीं हो सकता। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (2 जुलाई) को यह अहम टिप्पणी करते हुए मुंबई पुलिस का एक साल का एक्सटर्नमेंट(बाहर करने का) आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना और नारे लगाना संविधान के तहत नागरिकों का अधिकार है और केवल इसी वजह से किसी के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती।

जानें पूरा मामला


दरअसल, मुंबई पुलिस द्वारा 49 वर्षीय सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी के खिलाफ एक साल के लिए इलाके से बाहर करने का आदेश दिया गया था। इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति माधव जमदार ने मुंबई पुलिस द्वारा 49 वर्षीय सईद के खिलाफ जारी एक्सटर्नमेंट आदेश को रद्द कर दिया। सईद सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव हैं और केंद्र सरकार के विभिन्न फैसलों के विरोध में मोर्चे और धरने आयोजित करते रहे हैं।

रिकॉर्ड के अनुसार, उनके खिलाफ दर्ज पांच एफआईआर के आधार पर उन्हें एक साल के लिए इलाके से बाहर करने का आदेश दिया गया था। इनमें अधिकांश मामले केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करने से जुड़े थे। इनमें नागरिकता कानून में संशोधन और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के विरोध में आयोजित प्रदर्शन भी शामिल थे।

हाईकोर्ट ने की यह टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जमदार ने मुंबई पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने मौखिक टिप्पणी में कहा कि केवल सरकार के खिलाफ नारे लगाने या उसके फैसलों का विरोध करने के कारण किसी नागरिक को दंडित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद' या 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाता है, तो केवल इस आधार पर उसके खिलाफ एक्सटर्नमेंट जैसी कार्रवाई नहीं की जा सकती। न्यायाधीश ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

न्यायमूर्ति ने आगे यह भी सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे विरोध-प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते - यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो गए हैं। अगर लोग विरोध करते हैं, तो आप उन पर केस दर्ज कर देंगे, यह क्या है? विरोध करना नागरिकों का अधिकार है।

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