न्यायमूर्ति बोरकर ने अपने फैसले में कहा, 'भले ही आरोप सही माने जाएं कि आरोपी ने मीटिंग के दौरान महिला के सीने को घूरा था, फिर भी यह ‘ताक-झांक’ की परिभाषा में नहीं आता। धारा 354C विशेष रूप से उन स्थितियों के लिए है जहां कोई व्यक्ति किसी महिला के निजी अंगों को देखता है जबकि वे खुले हों, या महिला शौचालय जैसे निजी स्थान पर हो, या कोई यौन संबंधी निजी क्रिया कर रही हो जो सामान्यतः सार्वजनिक नहीं होती। कार्यालय जैसे पेशेवर माहौल में घूरना इस श्रेणी में नहीं आता।'