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Bombay High Court की टिप्पणी: सुरक्षा किसी भी धर्म से ऊपर, कहीं भी नमाज पढ़ना अधिकार नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एयरपोर्ट के पास नमाज पढ़ने की अनुमति मांग रहे टैक्सी और ऑटो चालकों को राहत देने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि सुरक्षा किसी भी धर्म से ऊपर है और किसी भी व्यक्ति को किसी भी स्थान पर नमाज अदा करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता, खासकर संवेदनशील इलाकों में।

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भारत

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Anurag Animesh

Mar 06, 2026

Bombay High Court

Bombay High Court

Bombay High Court ने गुरुवार को एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि सुरक्षा किसी भी धर्म से ऊपर है। किसी भी जगह नमाज पढ़ना धार्मिक अधिकार नहीं है। अदालत ने एयरपोर्ट के पास नमाज अदा करने की अनुमति मांग रहे टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस बी पी कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने कहा कि रमजान इस्लाम का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन किसी भी व्यक्ति को यह धार्मिक अधिकार नहीं मिल जाता कि वह किसी भी स्थान पर नमाज अदा करने की मांग करे, खासकर संवेदनशील क्षेत्र के आसपास।

क्या है मामला?


यूनियन का कहना था कि एयरपोर्ट के पास एक अस्थायी शेड में वे नमाज पढ़ते थे, जिसे पिछले वर्ष तोड़ दिया गया। अब उसी जगह व्यवस्था की जाए या विकल्प दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि धर्म हो या कुछ और, सुरक्षा पहले आती है। इससे समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि विवादित स्थान से एक किलोमीटर के भीतर एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज अदा की जा सकती है।

नमाज अदा करने से नहीं रोक सकते- Bombay High Court


हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह तय नहीं कर सकते कि वे किस स्थान पर नमाज पढ़ेंगे। अगर कोई यह कहे कि वह ओवल मैदान के बीच में खड़े होकर नमाज अदा करेगा, तो यह स्वीकार्य नहीं हो सकता। अदालत ने दोहराया कि नमाज अदा करने से किसी को रोका नहीं जा रहा है, लेकिन इसे किसी भी स्थान पर करने का अधिकार नहीं माना जा सकता, खासकर जब सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं हों।