6 मार्च 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दूध से बना नया बायोप्लास्टिक: 13 हफ्तों में मिट्टी में घुल जाएगा, पर्यावरण के लिए सुरक्षित विकल्प

ऑस्ट्रेलिया की फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने दूध के प्रोटीन केसिन से नया बायोप्लास्टिक विकसित किया है। यह पतली, लचीली सामग्री सामान्य प्लास्टिक का सुरक्षित विकल्प बन सकती है। खास बात यह है कि यह करीब 13 हफ्तों में मिट्टी में टूटकर खत्म हो जाती है और कम जहरीली पाई गई है।

less than 1 minute read
Google source verification

भारत

image

Anurag Animesh

Mar 06, 2026

Milk based bioplastic,

Milk Based Bioplastic(AI Image-ChatGpt)

Milk Based Bioplastic: दुनियाभर में बढ़ते प्लास्टिक कचरे और उससे होने वाले पर्यावरण-स्वास्थ्य के नुकसान को देखते हुए वैज्ञानिक अब सुरक्षित विकल्प खोजने में जुटे हैं। ऑस्ट्रेलिया की फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने दूध के प्रोटीन से एक नया बायोप्लास्टिक तैयार किया है। यह सामग्री सामान्य प्लास्टिक की तरह उपयोगी होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए अधिक सुरक्षित है। शोधकर्ताओं ने वैज्ञानिकों ने दूध के प्रोटीन केसीन से बनने वाले कैल्शियम केसिनेट का उपयोग करके एक पतली और लचीली फिल्म तैयार की। इसे संशोधित स्टार्च और बेंटोनाइट नैनोक्ले के साथ मिलाया गया। इसके बाद इसे मजबूत और लचीला बनाने के लिए ग्लिसरॉल और पॉलीविनाइल अल्कोहल भी मिलाया गया।

Milk Based Bioplastic: यह कम जहरीला भी


टेस्ट में पता चला कि यह बायोप्लास्टिक सामान्य मिट्टी में धीरे-धीरे टूट जाता है और करीब 13 हफ्तों में पूरी तरह खत्म हो सकता है। माइक्रोबियल टेस्ट में बैक्टीरिया का स्तर स्वीकार्य सीमा के भीतर पाया गया, जिससे पता चलता है कि यह पदार्थ कम जहरीला है।

Plastic के विकल्प क्यों जरूरी?


खाने की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला सिंगल-यूज प्लास्टिक दुनिया में बढ़ते प्रदूषण की बड़ी वजह बन गया है। कई प्लास्टिक में रंग और अन्य केमिकल मिलाए जाते हैं, जिनमें से कुछ सेहत के लिए बहुत हानिकारक होते हैं। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर दुनियाभर में मिलकर कदम नहीं उठाए गए तो 2020 से 2040 के बीच प्लास्टिक उत्पादन करीब 70% तक बढ़ सकता है।