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Iran-US Peace Talk को लेकर BRICS की मीटिंग में आया अजीत डोभाल का बयान, बोले – उम्मीद है यह कारगर साबित होगा

US-Iran Peace Talk: भारत ने अमेरिका–ईरान समझौता ज्ञापन पर सतर्क आशावाद जताते हुए इसे ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिए सकारात्मक बताया है।

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भारत

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Devika Chatraj

Jun 23, 2026

Ajit Doval

BRICS की मीटिंग में आया अजीत डोभाल का बयान (ANI)

BRICS 2026: वैश्विक राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौता ज्ञापन (MoU) को लेकर भारत ने सकारात्मक रुख अपनाया है। भारत का मानना है कि अगर यह समझौता सफल होता है, तो इससे दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था को बड़ा फायदा मिल सकता है।

दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर है समझौता

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने इस समझौते को लेकर सतर्क आशावाद जताया है। उन्होंने कहा कि यह कदम पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने और वैश्विक व्यापार को मजबूत करने में मदद कर सकता है। डोभाल के अनुसार, यह समझौता केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर

इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा ऊर्जा क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट जैसे जरुरी समुद्री मार्गों पर अगर आवाजाही सुनिश्चित होती है, तो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में स्थिरता आएगी। NSA डोभाल ने भी संकेत दिया कि इससे ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता कम होगी और उर्वरक व रसायन जैसे जरूरी सेक्टरों में सप्लाई बेहतर हो सकती है।

सप्लाई चेन को राहत

अगर यह समझौता आगे बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को मजबूती मिलेगी। समुद्री व्यापार की सुरक्षा बढ़ने से सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटें कम हो सकती हैं। डोभाल ने यह भी कहा कि इससे आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और वैश्विक बाजार में स्थिरता देखने को मिलेगी।

अमेरिका की सकारात्मक प्रतिक्रिया

अमेरिका की ओर से भी इस बातचीत को सकारात्मक बताया गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता को 36 घंटे की बहुत अच्छा बताया उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के परमाणु निरीक्षण जैसे अहम मुद्दों पर प्रगति हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी का पहले का रुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की कोशिशों का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का स्वागत किया था और क्षेत्र में स्थायी शांति पर जोर दिया था। पीएम मोदी ने कहा था कि संघर्ष से न केवल क्षेत्रीय देश प्रभावित होते हैं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ता है।