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परदादा के डायरी में जिक्र देख 1970 में भारत आई तो यहीं की होकर रह गई, ‘पद्म श्री’ पेपिटा को अब मिली नागरिकता

डायरी में भारत का जिक्र देख 1970 में घूमने आई थी। भारतीय कला-संस्कृति से हुआ प्रेम तो पांच दशक से यहीं निवास किया। अब उन्हें भारतीय नागरिकता भी मिल गई। पढ़ें पूरी खबर...

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पेपिटा को मिली नागरिकता (फोटो-ANI)

पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित ब्रिटिश मूल की फोटोग्राफर पेपिटा सेठ (Pepita Seth) को 84 वर्ष की उम्र में भारतीय नागरिकता मिल गई है। त्रिशूर के जिला कलेक्टर अर्जुन पांडियन ने एक समारोह का आयोजन कर उन्हें नागरिकता का प्रमाणपत्र सौंपा। पांच दशकों से अधिक समय केरल में रहते हुए बिताने के बाद उन्होंने 2024 में नागरिकता के लिए आवेदन किया था। नागरिकता मिलने पर उन्होंने कहा, "मैं खुश हूं कि मैं भारतीय नागरिक बन गई हूं। यह मेरा सपना था।"

परदादा की डायरी पढ़ हुआ भारत से आकर्षण

इंग्लैंड के सफोक में जन्मी पेपिटा ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म एडिटर के तौर पर की। 1968 में उन्हें अपने परदादा की डायरी मिली, जो ब्रिटिश सैनिक को तौर पर भारत में तैनात थे। डायरी को पढ़कर उनके मन में भारत के लिए एक आकर्षण पैदा हुआ और 1970 में वे पहली बार भारत भ्रमण पर आई। 1972 में केरल की यात्रा के दौरान यहां की संस्कृति से उन्हें इतना लगाव हो गया कि वे 1979 में स्थायी रूप से त्रिस्सूर के गुरुवायुर में बस गई।

केरल की संस्कृति को समर्पित किया जीवन

पेपिटा ने केरल के मंदिरों की स्थापत्य कला, गुरुवायूर के केशवन हाथी और थेय्यम परंपरा को अपनी फोटोग्राफी से विश्वभर में प्रसिद्ध किया। उनकी खेंची हुई कई तस्वीरें दुनियाभर के समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने 'हेवन ऑन अर्थ', 'द डिवाइन फ्रेंजी' और 'इन गॉड्स मिरर' जैसी प्रसिद्ध पुस्तकें भी लिखी हैं। भारत सरकार ने 2012 में उन्हें कला और संस्कृति के क्षेत्र में पद्म श्री (Padma Shri) से सम्मानित किया था।