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IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में 16 आरोपी गिरफ्तार, चंडीगढ़-पंचकूला में CBI की बड़ी कार्रवाई

CBI Raid: CBI ने हरियाणा में कथित बैंकिंग/सरकारी फंड घोटाले को लेकर चंडीगढ़, पंचकूला समेत 7 ठिकानों पर छापेमारी की और कई दस्तावेज व डिजिटल सबूत जब्त किए।

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CBI Raid

IDFC First Bank फ्रॉड केस में CBI की छापेमारी (AI Image)

IDFC First Bank Fraud Case: हरियाणा में कथित बैंकिंग घोटाले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़, पंचकूला और आसपास के कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह मामला IDFC First Bank और AU Small Finance Bank से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले से संबंधित है, जिसे हरियाणा सरकार ने जांच के लिए CBI को सौंपा था।

7 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

CBI ने इस मामले में कुल 7 अलग-अलग स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें आरोपियों के आवास, ज्वेलर्स के व्यावसायिक प्रतिष्ठान, शोरूम, सरकारी धन के कथित लाभार्थियों के ठिकाने और जांच से जुड़े निजी संस्थानों के परिसर शामिल रहे।

कई दस्तावेज बरामद

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे हैं, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। प्रारंभिक जांच में ये सामग्री कथित घोटाले से जुड़े लेनदेन और वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करती है।

अब तक 16 आरोपी गिरफ्तार

CBI ने इस मामले में अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने संकेत दिया है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और कई अहम सुरागों पर काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है ताकि हर कड़ी को जोड़ा जा सके।

8 अप्रैल को दर्ज हुई थी FIR

इस मामले की शुरुआत 8 अप्रैल को दर्ज की गई FIR से हुई थी, जिसके बाद CBI ने औपचारिक रूप से जांच शुरू की थी। यह केस पंचकूला स्थित IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के खातों में कथित रूप से सरकारी धन के गबन से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि फर्जी दस्तावेजों, अनधिकृत लेनदेन और आपराधिक साजिश के जरिए सरकारी फंड को गलत तरीके से डायवर्ट किया गया।

IAS अधिकारियों पर कार्रवाई

इस मामले में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों आरके सिंह और प्रदीप कुमार को निलंबित किया जा चुका है। इसके अलावा कई अन्य सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। FIR के अनुसार, यह कथित घोटाला 26 सितंबर 2025 से 23 फरवरी 2026 के बीच लगभग पांच महीनों तक चला। इस दौरान मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना 2.0 सहित विकास एवं पंचायत विभाग की विभिन्न योजनाओं के लिए जारी फंड को बिना अनुमति के डायवर्ट किया गया।

करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप

जांच में सामने आया है कि करीब 50 करोड़ रुपये IDFC First Bank के खातों में और लगभग 25 करोड़ रुपये AU Small Finance Bank के खातों में जमा किए गए थे। आरोप है कि इन धनराशियों को बाद में संदिग्ध लेनदेन के जरिए निकाला गया और कथित तौर पर गबन किया गया।

मामले की जांच जारी

CBI ने स्पष्ट किया है कि मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। एजेंसी का लक्ष्य इस पूरे घोटाले की तह तक पहुंचकर सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका उजागर करना है।