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ईरान युद्ध के नाम पर चैरिटी स्कैम, 16 करोड़ जमा होने का शक

ईरान युद्ध के नाम पर देश में चैरिटी स्कैम चल रहा है। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।

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ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध (Iran-US Israel War) का आज 28वां दिन है। इस युद्ध की वजह से जहाँ मिडिल ईस्ट (Middle East) में संकट गहराता जा रहा है, तो इसका असर भारत (India) पर भी पड़ रहा है। इतना ही नहीं, युद्ध के नाम पर देश में फर्जीवाड़ा भी हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की चेतावनी के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने एक बड़े चैरिटी स्कैम (Charity Scam) को लेकर अलर्ट जारी किया है। आईबी के अनुसार देश में कुछ शरारती तत्व इस युद्ध का फायदा उठाकर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। ये लोग युद्ध पीडि़तों की मदद के नाम पर अवैध रूप से चंदा जुटा रहे हैं।

करीब 16 करोड़ रुपए जमा होने का शक

आईबी को ईरान युद्ध के नाम पर चल रहे चैरिटी स्कैम के ज़रिए अब तक करीब 16 करोड़ रुपए जमा होने का शक है। इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि इस फंड का बड़ा हिस्सा आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

कई फर्जी संस्थाएं इस स्कैम में शामिल

आईबीअधिकारियों के अनुसार इस चैरिटी स्कैम में शामिल लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में ईरान में प्रभावित लोगों के नाम पर आर्थिक सहायता मांग रहे हैं। ये लोग भरोसा दिलाते हैं कि एकत्रित धनराशि युद्ध पीडि़तों के कल्याण के लिए भेजी जाएगी। जांच में यह भी सामने आया है कि इस काम में कई फर्जी संस्थाएं शामिल हैं, जो लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए एआई से तैयार की गई तस्वीरों और वीडियो का सहारा ले रही हैं।

जम्मू-कश्मीर में सबसे ज़्यादा असर

एजेंसियों की जांच में पता चला है कि इस चैरिटी स्कैम का सबसे ज्याज़्यादा असर जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में देखने को मिला है, जहाँ कुछ लोग घर-घर जाकर चंदा इकठ्ठा कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क वही पुराना तंत्र है जो अनुच्छेद 370 हटाए जाने से पहले आतंकी और अलगाववादी समूहों के लिए फंड जुटाने में सक्रिय रहा है।

ऑफलाइन तरीके कर रहे इस्तेमाल

एजेंसियाँ देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। ये ठग पकड़े जाने के डर से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। ऐसे में ये ठग अपना काम ऑफलाइन तरीके से कर रहे हैं जिससे उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो। इतना ही नहीं, लोगों को फर्जी रसीदें भी दी जा रही हैं। अधिकारियों को अंदेशा है कि इस फंड का एक बड़ा हिस्सा देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकता है।