scriptChitragupta Bhagwan Puja importance, right time and puja vidhi | Chitragupta Puja 2021: चित्रगुप्त भगवान की पूजा का महत्व, शुभ समय और पूजा-विधि | Patrika News

Chitragupta Puja 2021: चित्रगुप्त भगवान की पूजा का महत्व, शुभ समय और पूजा-विधि

Chitragupta Puja 2021: दीपावली त्यौहार के 5 दिन की त्यौहारी गतिविधियों के आखिरी दिन, यानि की भाईदूज के दिन चित्रगुप्त भगवान की पूजा भी की जाती है। आइए जानते है चित्रगुप्त पूजा से जुड़ी ज़रूरी बातों पर।

नई दिल्ली

Published: November 02, 2021 01:05:36 pm

नई दिल्ली। दीपावली त्यौहार के 5 दिन की त्यौहारी गतिविधियों के आखिरी दिन यानि की कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त भगवान की पूजा की जाती है। इस दिन को भाईदूज के रूप में भी मनाया जाता है। चित्रगुप्त भगवान का वर्णन पद्य पुराण, स्कन्द पुराण, ब्रह्मपुराण, यमसंहिता और याज्ञवलक्य स्मृति सहित कई ग्रंथों में किया गया है। लेखन कार्य से चित्रगुप्त भगवान का जुड़ाव होने की वजह से इस दिन कलम, दवात और बहीखातों की भी पूजा की जाती है। इस साल 6 नवंबर को चित्रगुप्त भगवान की पूजा की जाएगी।
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Chitragupta Puja 2021
चित्रगुप्त भगवान की पूजा का महत्व

चित्रगुप्त भगवान को देवलोक में धर्म का अधिकारी भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार चित्रगुप्त भगवान की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा के शरीर से हुई है। एक दूसरी कथा के अनुसार चित्रगुप्त भगवान की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई है। ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन से जिन 14 रत्नों की प्राप्ति हुई थी, उनमें से चित्रगुप्त भगवान की उत्पत्ति हुई थी। मान्यता के अनुसार चित्रगुप्त भगवान की लेखनी से जीवों को उनके कर्मों के अनुसार न्याय मिलता है। चित्रगुप्त भगवान की पूजा और उनसे अपने बुरे कर्मों के लिए माफ़ी मांगने से नरक नहीं भोगना पड़ता है।
chitragupt_bhagwan_1.jpgचित्रगुप्त भगवान की पूजा का शुभ मुहूर्त

चित्रगुप्त भगवान की पूजा का शुभ मुहूर्त 6 नवंबर को दोपहर 1:15 बजे से दोपहर 3:25 बजे तक है।


चित्रगुप्त भगवान की पूजा की विधि

चित्रगुप्त भगवान की पूजा करने से पहले पूजा स्थल को साफ कर एक चौकी बनाएं। उस पर एक कपड़ा बिछा कर चित्रगुप्त भगवान की तस्वीर रखें। अब पूजा की थाली में आवश्यक पूजा सामग्री रखें। अब पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें। इसके बाद दीपक जला कर चित्रगुप्तजी भगवान को रोली और अक्षत से टीका करें। इसके बाद फल, मिठाई, विशेष रूप से इस दिन के लिए बनाए गए विशेष पंचामृत और पान-सुपारी का भोग लगाएं। फिर गणेश वंदना करें। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य एक सादे कागज़ पर ‘ओम चित्रगुप्ताय नमः’ लिखे और बाकी बचे खाली कागज़ पर राम राम राम राम राम राम लिखकर उसे भर दे। चित्रगुप्त भगवान का दिहां करते हुए उनके मंत्र का उच्चारण करें। इसके बाद एक दूसरे कागज़ पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। इसके नीचे एक तरफ अपना नाम, पता और तारीख लिखें और दूसरी तरफ अपनी आय-व्यय का विवरण दें। इसके साथ ही अगले साल के लिए आवश्यक धन के लिए निवेदन करें। अब अपने हस्ताक्षर करके इस कागज़ को साफ़ नदी में विसर्जित करें।

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