
झारखंड में JPSC और JSSC में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन तेज
jharkhand students protestझारखंड में JPSC और JSSC में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन अब उग्र रूप लेने लगा है। बुधवार को विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ यह प्रदर्शन शनिवार को चौथे दिन भी जारी है। शुक्रवार शाम छात्रों ने जयपाल सिंह स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक कैंडल मार्च निकाला और JPSC के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इससे पहले गुरुवार को आजसू (AJSU) ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए छात्रों के साथ जयपाल सिंह स्टेडियम से राजभवन तक मार्च किया था। NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध के बाद शुरू हुए छात्र आंदोलनों से प्रेरित होकर झारखंड में 'JSSC-JPSC भ्रष्टाचार मुक्त अभियान' के बैनर तले यह प्रदर्शन शुरू हुआ है।
धरना स्थल पर हर दिन की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ होती है। मंच पर भगवान बिरसा मुंडा, डॉ. भीमराव अंबेडकर और महात्मा गांधी की तस्वीरें लगाई गई हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के लिए दिनभर भोजन और नाश्ते के पैकेट भी पहुंच रहे हैं। कई लोग बिना पहचान बताए भोजन उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि कुछ लोग दानपेटी में आर्थिक सहयोग दे रहे हैं। वहीं, कई नागरिक सिर्फ छात्रों का हौसला बढ़ाने और उनसे बातचीत करने के लिए धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं।
NEET विरोध-प्रदर्शनों से उत्साहित होकर बड़ी संख्या में छात्र और स्थानीय लोग इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं। धरना स्थल पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और आदिवासी छात्र संघ (ACS) समेत कई छात्र संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद हैं। इसके अलावा अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता, नागरिक समाज के सदस्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले शिक्षक भी आंदोलन को समर्थन देने पहुंच रहे हैं।
पिछले चार दिनों से जयपाल सिंह स्टेडियम में धरने पर बैठे छात्र हाथों में अपनी मांगों से जुड़ी तख्तियां लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि झारखंड में आयोजित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि JPSC पेपर लीक मामले की जांच एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को सौंप दी गई और बिना निष्पक्ष जांच पूरी किए JPSC पीटी परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया। छात्रों की मांग है कि JPSC पीटी परीक्षा रद्द कर दोबारा कराई जाए। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका सत्याग्रह जारी रहेगा।
दरअसल, रांची की बापू वाटिका में छोटी-सी सभा के रूप में शुरू हुआ यह आंदोलन अब राज्यव्यापी छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है। इसे विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है।
Updated on:
01 Aug 2026 11:57 am
Published on:
01 Aug 2026 11:50 am
