
AI से बना प्रतीकात्मक फोटो
Wife lipstick kajal midnight divorce case: झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंधों और मानसिक बीमारी के आधार पर तलाक से जुड़े एक बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी नई शादीशुदा महिला का देर रात काजल और लिपस्टिक लगाना या सजना-संवरना उसकी मानसिक बीमारी का सबूत नहीं हो सकता। बता दें कि इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की पीठ ने गिरिडीह फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए पति की तलाक की याचिका को खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि मामला 2015 में हुई एक शादी से जुड़ा है। पति का आरोप था कि शादी के बाद एक रात करीब 2 बजे जब उसकी नजर पत्नी पर पड़ी, तो वह अलमारी के सामने खड़ी होकर काजल और लिपस्टिक लगा रही थी। पति ने दावा किया कि इस दृश्य ने उसे डरा दिया और उसे लगा कि उसकी पत्नी मानसिक रूप से बीमार है। पति ने आरोप लगाया कि शादी से पहले लड़की वालों ने उसकी मानसिक स्थिति को छिपाया था। इसी आधार पर उसने अदालत से तलाक की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि तलाक के लिए मानसिक बीमारी को आधार तभी माना जा सकता है जब कोई ठोस और विश्वसनीय मेडिकल साक्ष्य यह साबित करे कि बीमारी इतनी गंभीर है कि सामान्य वैवाहिक जीवन बिताना असंभव है।
अदालत ने पति की सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि उसने पत्नी के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। अदालत ने कहा कि पति ने कई अस्पतालों में इलाज कराने का दावा तो किया, लेकिन एक भी मनोरोग विशेषज्ञ की रिपोर्ट या मेडिकल रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका। कोर्ट ने यह भी माना कि यह एक अरेंज मैरिज थी और शादी से पहले दोनों परिवारों की मौजूदगी में दोनों की मुलाकात और बातचीत हुई थी। यदि महिला के व्यवहार में कोई असामान्यता होती, तो वह उसी समय सामने आ जाती। साथ ही अदालत ने टिप्पणी की कि शादी के बाद किसी नई दुल्हन का देर रात भी काजल या लिपस्टिक लगाकर सजना-संवरना पूरी तरह सामान्य बात है और इसे मानसिक बीमारी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
वहीं, दूसरी ओर पत्नी ने अदालत को बताया कि उसके ससुराल वाले अतिरिक्त दहेज की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर उसे मानसिक रोगी बताकर प्रताड़ित किया जाने लगा। महिला के पिता ने पति के खाते में 1 लाख रुपए भी ट्रांसफर किए थे, लेकिन 2 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग पूरी न होने पर 10 जुलाई 2017 को पति उसे मायके छोड़ आया और अगले ही दिन कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी।
सुनवाई और मध्यस्थता के दौरान पत्नी ने हमेशा पति के साथ रहने की इच्छा जताई, लेकिन पति उसे वापस ले जाने को तैयार नहीं हुआ। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि शादी टूटने के लिए पत्नी नहीं, बल्कि खुद पति जिम्मेदार है और वह अपनी ही गलतियों का फायदा उठाकर तलाक नहीं ले सकता।
Updated on:
28 Jul 2026 05:38 pm
Published on:
28 Jul 2026 05:38 pm
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