
पलामू में गर्भवती टीचर के बच्चे की मौत, छुट्टी विवाद पर हंगामा। (फोटो-AI)
Jharkhand teacher baby death case: झारखंड के पलामू जिले से एक दुखद मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल की गर्भवती शिक्षिका के पति ने आरोप लगाया है कि समय पर छुट्टी नहीं मिलने की वजह से उनकी पत्नी को गर्भावस्था के आखिरी दिनों में भी रोज करीब 35 किलोमीटर का सफर करना पड़ा। इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्होंने मृत बच्चे को जन्म दिया।
यह मामला पलामू की शिक्षिका भारती पांडेय से जुड़ा है। भारती पांडेय तरहसी के सिलदिलिया प्लस-2 हाई स्कूल में कार्यरत हैं। फिलहाल वह चैनपुर के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में काम कर रही थीं।
भारती के पति मुकेश कुमार तिवारी हजारीबाग में पुलिस विभाग में तैनात हैं। उनका आरोप है कि उनकी पत्नी ने 3 जुलाई को छुट्टी के लिए आवेदन दिया था, लेकिन समय पर मंजूरी नहीं मिली। पति का कहना है कि छुट्टी पास कराने के लिए उनसे करीब 50 हजार रुपए मांगने की बात कही गई।
मुकेश तिवारी का आरोप है कि छुट्टी नहीं मिलने के कारण उनकी पत्नी को गर्भावस्था के आखिरी समय तक स्कूल आने-जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। रोज लंबी दूरी तय करने से उनकी परेशानी बढ़ती गई। जानकारी के मुताबिक, 25 जुलाई को छुट्टी मंजूर हुई, लेकिन इससे पहले ही स्कूल में भारती पांडेय की तबीयत अचानक खराब हो गई। उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की गर्भ में ही मौत हो चुकी है।
गर्भवती शिक्षिका के बच्चे की मौत और छुट्टी विवाद के बाद पलामू शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने मामले की जांच के बीच एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया है, जबकि एक अन्य कर्मचारी का तबादला कर दिया गया है।
शिक्षिका के पति ने छुट्टी मंजूर करने के बदले 50 हजार रुपए मांगने का आरोप लगाया था। हालांकि, जिला शिक्षा विभाग ने रिश्वत मांगने के आरोपों को गलत बताया है। अधिकारियों का कहना है कि छुट्टी मिलने में देरी फाइल प्रक्रिया पूरी होने में समय लगने की वजह से हुई। फिलहाल रिश्वत और लापरवाही के आरोपों की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, जिला शिक्षा पदाधिकारी ने रिश्वत मांगने के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि छुट्टी मिलने में देरी किसी मांग की वजह से नहीं हुई, बल्कि आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने में समय लगा था। वहीं, जिला प्रशासन ने भी इस मामले में अपनी सफाई दी है। प्रशासन के अनुसार, शिक्षिका ने मातृत्व अवकाश के लिए नहीं, बल्कि अपनी सात साल की बेटी की देखभाल के लिए चाइल्ड केयर लीव का आवेदन दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, 25 जुलाई को उनकी 185 दिनों की छुट्टी मंजूर कर दी गई थी।
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच चल रही है। प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पीड़ित परिवार मामले में जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
Updated on:
29 Jul 2026 11:38 am
Published on:
29 Jul 2026 11:38 am
