
चित्तूर मेयर दंपती हत्याकांड (सोशल मीडिया)
Chittoor Mayor Couple Murder Case: आंध्र प्रदेश के चित्तूर में 2015 के सनसनीखेज डबल मर्डर केस में दस साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला। चित्तूर की पहली महिला मेयर कटारी अनुराधा और उनके पति मोहन की हत्या के लिए ग्यारहवें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने पांच दोषियों को फांसी की सजा सुना दी। मुख्य आरोपी मोहन का भतीजा श्रीराम चंद्र शेखर उर्फ चिंटू और उसके चार साथी (वेंकटचलपति, जया प्रकाश रेड्डी, मंजूनाथ और वेंकटेश) को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी में रखते हुए मौत का फरमान सुनाया गया। जज एन श्रीनिवास राव ने इसे विश्वासघात और क्रूरता की पराकाष्ठा बताया।
दोपहर के वक्त चित्तूर नगर निगम कार्यालय में खौफनाक दृश्य था। बंदूक और खंजर से लैस पांच हमलावरों ने सुरक्षा तोड़कर मेयर कक्ष में घुसकर अनुराधा पर गोली चला दी। बाहर भागते मोहन का पीछा कर उन्हें चाकू से गोद दिया गया। दोनों की मौके पर मौत हो गई। अनुराधा 2014 में टीडीपी सरकार बनने के बाद चित्तूर की पहली महिला मेयर बनी थीं। मोहन टीडीपी चित्तूर इकाई के उपाध्यक्ष थे। यह हत्या राजनीतिक और पारिवारिक साजिश का नतीजा थी।
जांच में खुलासा हुआ कि चिंटू ने ही पूरी साजिश रची। मुंबई से 1994 में मरीन इंजीनियरिंग करने वाला चिंटू मर्चेंट नेवी में काम कर यूएई गया। 2002 में चित्तूर लौटकर मोहन के राजनीतिक अभियान में शामिल हुआ, लेकिन अनुराधा के मेयर बनने के बाद हाशिए पर धकेल दिया गया। चिंटू नगर निगम ठेकों और संयुक्त रेत-ग्रेनाइट खनन में बड़ा हिस्सा चाहता था। अनुराधा पर दबाव डाला, अधिकारियों से झड़प की और पुलिस को धमकाया। असफल होने पर उसने चार हत्यारों को सुपारी दी। पहले 23 आरोपी नामजद हुए; मुकदमे में एक की मौत हो गई, 16 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
मुकदमे में 122 गवाहों की पूछताछ हुई। कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय ट्रांजेक्शन, हथियारों की खरीद और गवाहों के बयान निर्णायक साबित हुए। चिंटू और मोहन का पुराना इतिहास भी सामने आया—2006 में दोनों कांग्रेस नेता सीके जयचंद्र रेड्डी की हत्या की साजिश में गिरफ्तार हुए थे। जमानत के बाद चुपचाप कारोबार करने लगे, लेकिन अनुराधा के उदय ने पुरानी कड़वाहट जगा दी। अदालत ने इसे पारिवारिक विश्वासघात करार दिया। शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा में दोषियों को पेश किया गया; दो जेल में हैं, तीन जमानत पर।
यह फैसला आंध्र की राजनीति में सनसनी मचा रहा है। टीडीपी ने इसे न्याय की जीत बताया, जबकि परिवार बिखर चुका है। अनुराधा के बेटे ने कहा, "सजा मिली, लेकिन माता-पिता लौट नहीं आएंगे।" विशेषज्ञों का मानना है कि महत्वाकांक्षा और लालच ने रिश्तों को खून से रंग दिया। यह केस राजनीतिक हत्याओं पर सख्ती की मिसाल बनेगा। चित्तूर में अब ऐसी साजिशों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
Published on:
31 Oct 2025 07:12 pm
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