
climate change mumbai and kolkata cities will be underwater by 2030
नई दिल्ली। दुनिया में बढ़ते जलवायु के खतरे को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद आए दिन जलवायु परिवर्तन का खतरा और गंभीर होता जा रहा है। एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगर जलवायु परिवर्तन को नहीं रोका गया तो साल 2030 तक भारत के मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों के कई इलाकों में पानी भर सकता है।
2050 तक शून्य होगा ग्रीन गैसों का उत्सर्जन
एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जलवायु परिवर्तन पर काबू पाने के सभी मौजूदा प्रयास प्रभावी साबित होते हैं तो भी अगले कुछ दशक में दुनिया के कई अहम शहरों को पानी में समाने से नहीं रोका जा सकता है। बताया गया कि सबसे बेहतर स्थिति होने पर भी 2050 के आसपास से ही वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन शून्य हो पाएगा। यह तभी संभव है जब जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए आज से ही कटौती शुरू की जाए।
स्थिति हो जाएगी गंभीर
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2040 तक तापमान में 1.5 डिग्री तक की वृद्धि होने का अनुमान है। इस कारण भारत के कुछ इलाकों में भारी बारिश के कारण बाढ़ तो कुछ इलाकों में सूखे जैसी स्थिति पैदा होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के कई हिस्सों में जलवायु परिवर्तन का असर दिखने भी लगा है। भारत में बीते कुछ सालों से बेमौसम बारिश, भूकंप, सूखा और तूफान के मामले बढ़ गए हैं। अगर ग्रीन गैसों के उत्सर्जन में कमीं नहीं हुई तो स्थिति गंभीर हो जाएगी।
कोस्टल रिस्क स्क्रीनिंग टूल से पता चला है कि 2030 तक भारत के कई शहरों के तटीय इलाके टाइड लेवल के नीचे आ जाएंगे। इसमें मुंबई के पूरा नवी मुंबई, सुंदरबन का तटीय इलाका। इसके साथ ही कोलाकात से लगे इलाके और ओडिशा कटक शहर के कई इलाके टाइड लेवल के नीचे आ जाएंगे। यह भी बताया गया कि अगर समंदर में पानी के स्तर में बढ़ोतरी नहीं रुकी तो केरल के कोच्चि और अन्य तटीय इलाके भी इसके चपेट में आ जाएंगे।
Published on:
11 Nov 2021 05:23 pm
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