
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पर कांग्रेस का आरोप (Photo-IANS)
LIC On Washington Post: अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट ने भारत की राजनीति में भूचाल ला दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई 2025 में भारतीय अधिकारियों ने LIC के 3.9 अरब डॉलर (करीब 33 हजार करोड़ रुपये) को अडाणी ग्रुप में निवेश करने का प्रस्ताव तैयार किया। कांग्रेस ने इसे 'मोदी-अडाणी गठजोड़' का सबूत बताते हुए संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) से जांच की मांग की है। वहीं, TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर रिपोर्ट शेयर कर सरकार पर निशाना साधा। LIC ने रिपोर्ट को 'फर्जी' बताते हुए खारिज कर दिया।
वॉशिंगटन पोस्ट की 24 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, जब गौतम अडाणी पर अमेरिका में घूसखोरी के आरोप लगे थे और उनका साम्राज्य कर्ज के बोझ तले दबा था, तब वित्तीय सेवा विभाग (DFS) और नीति आयोग ने मिलकर LIC को अडाणी कंपनियों में निवेश का प्रस्ताव बनाया। रिपोर्ट में आंतरिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा गया कि मई में अडाणी पोर्ट्स ने 5,000 करोड़ रुपये का बॉन्ड इश्यू किया, जिसे LIC ने अकेले सब्सक्राइब कर लिया। कुल 3.9 अरब डॉलर का यह निवेश कथित रूप से वित्त मंत्रालय की मंजूरी से हुआ, भले ही अडाणी शेयरों की अस्थिरता पर आंतरिक चिंताएं थीं। रिपोर्ट ने इसे 'क्रोनी कैपिटलिज्म' का उदाहरण बताया, जहां सार्वजनिक धन का इस्तेमाल निजी हितों के लिए किया गया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, यह LIC के 30 करोड़ पॉलिसीधारकों की बचत का दुरुपयोग है। मई 2025 में 33 हजार करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया, जबकि 2023 के हिंदनबर्ग रिपोर्ट के बाद भी निवेश जारी रहा। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पूछा, क्यों LIC का पैसा अडाणी को दिया जा रहा है? यह 'मोदी जी का दोस्त' का फायदा है। 2024 में अमेरिकी अदालत में अडाणी पर 2,000 करोड़ की रिश्वतखोरी का आरोप लगा, जिसके बाद LIC को 7,850 करोड़ का नुकसान हुआ। कांग्रेस ने 2023 के अडाणी FPO में LIC-SBI के 525 करोड़ निवेश पर भी सवाल उठाए। महुआ मोइत्रा ने एक्स पर रिपोर्ट शेयर कर लिखा, अडाणी के संकट में LIC का पैसा, जनता का नुकसान! CPI(M) ने इसे 'सार्वजनिक धन का दुरुपयोग' कहा।
LIC ने शनिवार को बयान जारी कर रिपोर्ट को झूठा, आधारहीन और सत्य से परे बताया। कंपनी ने कहा कि कोई ऐसा दस्तावेज या प्रस्ताव कभी तैयार नहीं हुआ। सभी निवेश बोर्ड-अनुमोदित नीतियों के तहत विस्तृत जांच के बाद स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं। एक्स पर पोस्ट में LIC ने स्पष्ट किया, केंद्रीय वित्त मंत्रालय या अन्य निकायों की निवेश निर्णयों में कोई भूमिका नहीं।
कंपनी ने दावा किया कि 2014 से उसके निवेश मूल्य 10 गुना बढ़कर 15.6 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो मजबूत फंड प्रबंधन को दर्शाता है। शीर्ष 500 कंपनियों में निवेश में रिलायंस (1.38 लाख करोड़), ITC (82,000 करोड़), HDFC बैंक आदि शामिल हैं। अडाणी में निवेश कुल संपत्ति का 1% से कम है। LIC ने कहा कि यह रिपोर्ट कंपनी की छवि खराब करने और भारत के वित्तीय क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है। सभी निर्णय हितधारकों के हित में, नियामक दिशानिर्देशों का पालन करते हुए लिए जाते हैं।
Updated on:
25 Oct 2025 04:52 pm
Published on:
25 Oct 2025 04:49 pm
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