कांग्रेस में सीमित दायरे में फैसले लेने की शैली अब संगठन और चुनावी प्रदर्शन दोनों पर असर डालती नजर आ रही है। पार्टी के भीतर यह धारणा मजबूत हो रही है कि कमजोर सलाहकार तंत्र और बढ़ते केंद्रीकरण ने निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित किया है। दरअसल, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में संगठनात्मक ढांचे को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। पिछला साल संगठन सृजन के नाम रहा, पर राष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्रीय और जातीय असंतुलन के आरोप भी सामने आए हैं। खरगे खुद कर्नाटक से आते हैं, जबकि संगठन महासचिव का अहम पद के.सी. वेणुगोपाल के पास है, जो केरल से हैं। इसके अलावा कई नेता वर्षों से महासचिव जैसे पदों पर बने हुए हैं, जिससे नए संतुलन की गुंजाइश सीमित दिखती है।