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कांग्रेस को विधानसभा चुनावों के परिणाम से पहले ही लगा बड़ा झटका, वरिष्ठ नेता AK Antony ने छोड़ा साथ

कांग्रेस वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी ने कांग्रेस नेतृत्व को सूचित किया है कि वह अपनी राज्यसभा सीट के लिए फिर से चुनाव नहीं लड़ेंगे और अप्रैल में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद अपने गृह राज्य केरल वापस चले जाएंगे।

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Mahima Pandey

Mar 09, 2022

Congress leader AK Antony bids goodbye to electoral politics and Delhi

Congress leader AK Antony bids goodbye to electoral politics and Delhi

गुरुवार को विधानसभा चुनावों के नतीजे आने हैं उससे पहले ही कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने सक्रिय राजनीति, संसद और दिल्ली को अलविदा कहने का निर्णय लिया है। 81 वर्षीय एके एंटनी ने इसकी जानकारी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र भी लिखा है। इसके साथ ही उन्होंने केरल कांग्रेस को भी इस बारे में सूचित कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वो अब राज्यसभा के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनका राज्यसभा कार्यकाल 2 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि तिरुवनंतपुरम लौटने के लिए वो दिल्ली छोड़ रहे हैं।

पहले ही सोनिया गांधी को दे दी जानकारी
एके एंटनी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, 'मैंने सक्रिय राजनीति छोड़ने की जानकारी सोनिया गांधी को जानकारी दे दी है। मैंने कुछ महीने पहले ही सोनिया गांधी को बता दिया था। मैंने PCC प्रेसिडेंट और अन्य साथियों को भी जानकारी दे दी है। पार्टी ने मुझे कई अवसर दिए और मैं हमेशा कांग्रेस का आभारी रहूंगा। अब मैं अप्रैल में दिल्ली छोड़कर तिरुवनंतपुरम जाना चाहता हूं।'

कौन हैं एके एंटनी ?
एके एंटनी 52 साल से राजनीति में हैं और 1970 में केरल में विधायक चुने गए थे। वो कांग्रेस की छात्र इकाई के नेता भी थे। केवल 37 साल की उम्र में ही वो मुख्यमंत्री बने थे। वो तीन बार केरल के मुख्यमंत्री रहे हैं। 10 वर्षों तक केरल में कांग्रेस की कमान संभालने के बाद वो केंद्र में भी काम कर चुके हैं। वो 5 बार विधायक, 5 बार राज्यसभा के सांसद और 3 बार केन्द्रीय मंत्री भी रहे हैं। पिछले वर्ष केरल विधानसभा चुनावों के दौरान भी उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ने की बात कही थी। एके एंटनी सोनिया गांधी के काफी करीब भी माने जाते हैं।

बता दें कि केरल की राजनीति में कांग्रेस के लिए उनका योगदान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान वह ऑळ इंडिया कांग्रेस कमिटी के महासचिव भी रहे हैं। वर्ष 2004 में वह केरल छोड़ दिल्ली चले गए। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार में उन्होंने रक्षा मंत्री का दायित्व निभाया।

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