
Indore court Garland of shoes thrown at judge in Indore court
केरल की एक अदालत ने 48 वर्षीय व्यक्ति को पेरूरकाडा के निकट अपने घर में अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ यौन उत्पीड़न के लिए कुल 14 साल कैद की सजा सुनाई है। तिरुवनंतपुरम फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की न्यायाधीश आर रेखा ने व्यक्ति को धारा 9(एल) के तहत बार-बार यौन उत्पीड़न और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 9(एन) के तहत रक्त संबंधी द्वारा यौन उत्पीड़न के लिए सात-सात साल की सजा सुनाई।
31 मई के आदेश की पुष्टि विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) आर एस विजय मोहन ने की। जिन्होंने कहा कि चूंकि सजाएं एक साथ पूरी होनी हैं। इसलिए व्यक्ति को सात साल की सजा काटनी होगी, जो उसे दी गई सजाओं में सबसे अधिक है। एसपीपी ने कहा कि अदालत ने दोषी पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके अलावा, अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को पर्याप्त मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।
एसपीपी ने कहा कि पीड़िता और उसके पिता तमिलनाडु के मूल निवासी हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, बच्ची ने कहा था कि उसके पिता ने कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 से लगातार उसका यौन शोषण किया। इसके बाद, पिछले साल फरवरी में एक रात, जब वह सो रही थी, तो आरोपी ने उसके निजी अंगों को पकड़ लिया। पीड़िता का भाई और बड़ी बहन तमिलनाडु में थे, इसलिए घटना के समय घर पर कोई नहीं था।
अभियोजक ने कहा कि लड़की की मां ने कथित तौर पर आरोपी के उत्पीड़न के कारण आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद परिवार तिरुवनंतपुरम चला गया। उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न के अलावा, बच्ची को पीटा भी गया और एक बार उसका हाथ भी तोड़ दिया गया। बच्ची ने कभी भी हमलों के बारे में नहीं बताया क्योंकि शिकायत दर्ज होने पर उसकी रक्षा करने वाला कोई और नहीं था। एसपीपी ने कहा कि यौन शोषण बढ़ता गया। पीड़िता ने स्कूल में अपने दोस्तों को बताया, फिर उसने अपने टीचरों को इसके बारे में बताया।
शिक्षकों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और आरोपी को पिछले साल गिरफ्तार किया गया। अभियोजक ने कहा कि अदालत ने पाया कि जिस व्यक्ति ने अपनी ही बच्ची का यौन उत्पीड़न किया। एसपीपी ने कहा कि अदालत ने यह भी पाया कि आरोपी ने बच्ची की लाचारी का फायदा उठाया।
Updated on:
02 Jun 2024 01:28 pm
Published on:
02 Jun 2024 01:22 pm
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