
सुप्रीम कोर्ट (ANI)
दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में शरजील इमाम, उमर खालिद और अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं का सुप्रीम कोर्ट में कड़ा विरोध किया। पुलिस ने तर्क दिया कि आतंकवाद में शामिल बुद्धिजीवी जमीन पर काम करने वालों से कहीं अधिक खतरनाक होते हैं।
जमानत याचिका पर बहस के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी. राजू ने 10 नवंबर को लाल किला पर हुए विस्फोट का उदाहरण दिया और कहा कि अब डॉक्टरों-इंजीनियरों का राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल होना एक चलन बन गया है। उन्होंने कोर्ट को शरजील इमाम के कथित भड़काऊ भाषणों के वीडियो क्लिप्स भी दिखाए।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र शरजील इमाम जनवरी 2020 से जेल में हैं। उन पर देशद्रोह और यूएपीए की धारा 13 सहित कई गंभीर आरोप हैं। इमाम, उमर खालिद और अन्य ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 2 सितंबर 2025 को जमानत ठुकराने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ मामले की सुनवाई कर रही है।
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कई वीडियो पेश किए, जो आरोपपत्र का हिस्सा हैं। इनमें इमाम को 2019-2020 में चाखंड, जामिया, अलीगढ़ और आसनसोल में दिए गए भाषण दिखाए गए। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, 16 दिसंबर 2019 को अलीगढ़ में दिए भाषण में इमाम ने कथित तौर पर कहा था, 'अगर हम संगठित हों और 5 लाख लोग हों तो हम असम और उत्तर-पूर्व को भारत से हमेशा के लिए काट सकते हैं। अगर हमेशा के लिए नहीं, तो कम से कम एक-दो महीने के लिए तो जरूर। चिकन नेक पर इतना मलबा डाल दो कि रेलवे को साफ करने में एक महीना लग जाए।' एक अन्य क्लिप में वे पूरे देश में सीएए विरोध में 'चक्का जाम' करने के लिए भीड़ को उकसाते नजर आ रहे हैं।
Updated on:
20 Nov 2025 09:37 pm
Published on:
20 Nov 2025 09:37 pm
