Delhi Liquor Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को मनीष सिसोदिया को अपनी पत्नी से मिलने के लिए 7 घंटे की जमानत दी। इस दौरान उन्हें सिर्फ अपने परिवार से बात करने की इजाजत है।
Delhi Liquor Case: 95 दिनों से आबकारी घोटाले के आरोप में जेल में बंद दिल्ली के पूर्व डिप्टी CM और आप नेता मनीष सिसोदिया को कल अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए कोर्ट ने 7 घंटे की मोहलत दी थी। जिसके बाद आज मनीष पत्नी सीमा से मिलने दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुंचे। दिल्ली हाई कोर्ट ने कल उन्हें अपनी बीमार पत्नी से सुबह 10 बजे से आज शाम 5 बजे तक मिलने की अनुमति कई शर्तों के साथ दी थी। लेकिन सिसोदिया घर पहुंचने के बाद भी अपनी पत्नी से नहीं मिल पाए। मनीष सिसोदिया के घर पहुंचने से पहले ही उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जिस कारण उन्हें तुरंत नजदीकी एलएनजेपी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एडमिट करना पड़ा। कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को सिर्फ घर जाने की ही इजाजत दी है, इसीलिए वे अस्पातल में भर्ती अपनी पत्नी से मुलाकात नहीं कर पाएंगे। दिल्ली पुलिस की सुरक्षा के बीच सिसोदिया अपने घर पर ही रहेंगे और उसके बाद वापस जेल चले जाएंगे।
हाई कोर्ट ने इन शर्तों पर दी राहत
बता दें कि,दिल्ली हाई कोर्ट ने छोटी सी राहत देते हुए कहा मनीष सिसोदिया से कहा कि वो इस दौरान मीडिया से बात नहीं करेंगे। उन्हें सिर्फ अपने परिवार से बात करने की इजाजत होगी। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि उन्हें मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल किसी भी हाल में नहीं करना है।
अदालत ने सिसोदिया को पत्नी की डिटेल मेडिकल रिपोर्ट शनिवार शाम तक दाखिल करने को कहा है और साथ ही वो पुलिस हिरासत में उनसे मिल सकते हैं। दरअसल सिसोदिया ने पत्नी की सेहत का हवाला देते हुए जमानत की मांग की थी। जिसके बाद उन्हें लगातार 95 दिन जेल में रहने के बाद 7 घंटे की मोहलत मिली थी।
मनीष सिसोदिया के वकील ने क्या दलील दी
दिल्ली हाई कोर्ट में मनीष सिसोदिया के जमानत को लेकर गुरुवार को सुनवाई हुई थी। इस दौरान सिसोदिया के वकील ने बताया था कि यह नीति तब वापस ली गयी जब दिल्ली के उपराज्यपाल ने शराब की दुकानों को निषिद्ध क्षेत्रों में खोलने की अनुमति नहीं दी थी। जिसके कारण काफी नुकसान हुआ। उन्होंने आगे कहा कि 10 साल के लिए लागू पहले की नीति के तहत ऐसे इलाकों में दुकानें खोली गयी थी।
वहीं ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने दावा किया कि आरोपियों के गलत कारनामों का खुलासा होने के कारण इस नीति को जल्दीबाजी में वापस ली गयी। पहले तो दिल्ली सरकार ने इस पालिसी को सही बताया था फिर बाद में ऐसा की हुआ की इसे वापस लेना पड़ा। यह बात कहीं न कहीं पहली नजर में सही भी लगती है।
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