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Delhi-NCR में जहरीली हुई हवा: 450 के पार पहुँचा AQI, साँस लेना हुआ दूभर

Pollution: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में पहुँच गया है, जहाँ कई इलाकों में AQI 450 के पार दर्ज किया गया। प्रशासन ने GRAP-4 लागू कर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी है।

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भारत

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MI Zahir

Jan 19, 2026

Delhi NCR Air pollution

दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण। ( फोटो: IANS )

Severe: देश की राजधानी और उसके आसपास के इलाकों (NCR) में रहने वाले लोगों के लिए आज की सुबह किसी दुःस्वप्न जैसी रही। आसमान में सूरज की रोशनी की जगह जहरीली धुंध (Smog) की चादर लिपटी हुई है। प्रदूषण का स्तर (Delhi air quality severe) इतना बढ़ गया है कि दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (Delhi air quality) 450 और 500 के बीच झूल रहा है। प्रशासन ने इसे 'गंभीर प्लस' श्रेणी का संकट मानते हुए अब सबसे सख्त पाबंदियां यानि GRAP चरण 4 लागू कर दिया है।

प्रदूषण के केंद्र: वजीरपुर और लोनी सबसे खराब

दिल्ली के लगभग हर कोने में हवा का दम घुट रहा है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो वजीरपुर (473) और विवेक विहार (472) में स्थिति सबसे भयावह है। इसके अलावा रोहिणी, जहांगीरपुरी और आनंद विहार जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी AQI 460 के पार है। यही हाल नोएडा और गाजियाबाद का भी है। गाजियाबाद के लोनी में AQI 476 दर्ज किया गया है, जो फेफड़ों के लिए किसी गंभीर खतरे से कम नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में मौजूद PM 2.5 कणों की मात्रा इतनी अधिक है कि स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस लेने में तकलीफ हो रही है।

मौसम ने बिगाड़ा खेल: कोहरा और रुकी हुई हवा

इस साल प्रदूषण के खतरनाक स्तर के पीछे केवल धुआं ही नहीं, बल्कि मौसम की मार भी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली में घना कोहरा छाया हुआ है। हवा की गति लगभग शून्य है, जिसकी वजह से प्रदूषक तत्व (Pollutants) वातावरण में ऊपर नहीं जा पा रहे और जमीन के करीब ही फंस गए हैं। उच्च आर्द्रता (Humidity) ने धुएं को और घना बना दिया है, जिससे विजिबिलिटी भी प्रभावित हुई है।

क्या हैं GRAP-4 की पाबंदियां ?

हालात की गंभीरता को देखते हुए अब दिल्ली की सीमाओं पर पहरा सख्त कर दिया गया है:

भारी वाहनों की एंट्री बंद: जरूरी सामान ले जाने वाले ट्रकों के अलावा अन्य भारी डीजल वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

निर्माण कार्य ठप: सरकारी और निजी, सभी तरह के निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) के कामों पर पूर्ण प्रतिबंध है।

स्कूल और दफ्तर: कई इलाकों में छोटे बच्चों के लिए स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है या उन्हें ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट करने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य सलाह: घर में रहें, मास्क पहनें

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह हवा केवल बुजुर्गों या मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि युवाओं के लिए भी घातक है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे सुबह की सैर (Morning Walk) से बचें और अगर बाहर निकलना जरूरी हो, तो केवल N-95 मास्क का ही प्रयोग करें। घर के भीतर भी एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल और तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाने की सलाह दी जा रही है।

स्थानीय निवासियों में नाराजगी

इस स्थिति पर विशेषज्ञों और जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है। पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल GRAP-4 लागू करना "आग लगने पर कुआं खोदने" जैसा है; इसके लिए साल भर की ठोस नीति की जरूरत है। वहीं, स्थानीय निवासियों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि हर साल जनवरी में यही कहानी दोहराई जाती है, लेकिन स्थायी समाधान के नाम पर केवल पाबंदियां ही मिलती हैं, जिससे दिहाड़ी मजदूरों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को आर्थिक नुकसान होता है।

सरकार के अगले कदम

मौसम का पूर्वानुमान: अगले 48 घंटों तक हवा की गति तेज होने की कोई संभावना नहीं है, जिसका मतलब है कि राहत मिलने के आसार कम हैं।

सरकारी समीक्षा बैठक: दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल आज एक आपातकालीन बैठक कर सकते हैं, जिसमें दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम (WFH) लागू करने पर फैसला लिया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी: वायु प्रदूषण पर चल रही सुनवाई में अदालत प्रशासन से अब तक उठाए गए कदमों की रिपोर्ट मांग सकती है।

पर्यटन और व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है

बहरहाल, प्रदूषण का एक अनदेखा पहलू 'इकोनॉमिक स्लोडाउन' भी है। निर्माण कार्यों पर रोक लगने से लाखों दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी छिन जाती है। साथ ही, धुंध के कारण दिल्ली आने-जाने वाली 50 से अधिक उड़ानें और दर्जनों ट्रेनें देरी से चल रही हैं, जिससे पर्यटन और व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है। 'क्लीन एयर' अब केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक मुद्दा बन चुका है।