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दिल्ली पुलिस ने हटाये पहलवानों के तंबू , जंतर-मंतर पर अब नहीं मिलेगी धरने की इजाजत

दिल्ली पुलिस ने पूरे धरना स्थल को खाली करवा दिया है। पुलिस का कहना है कि बार -बार अनुरोध किए जाने के बावजूद कल प्रदर्शनकारियों ने कानून का उल्लंघन किया। इसीलिए धरने को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

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Wrestlers Protest: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर में कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे भारतीय पहलवानों का दिल्ली पुलिस ने धरना खत्म करा दिया है। पुलिस के मुताबिक पहलवानों को अब जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलेगी और उन्हें यहां से हटा दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस का कहना है कि बार -बार अनुरोध किए जाने के बावजूद कल प्रदर्शनकारियों ने कानून का उल्लंघन किया। इसीलिए धरने को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। जंतर मंतर के अलावा पहलवान किसी अन्य जगह पर प्रदर्शन के लिए मांगते हैं तो दी जाएगी।

दिल्ली पुलिस के पीआरओ सुमन नलवा ने कहा, 'कल पुलिस ने सभी को शांतिपूर्वक तरीके से हिरासत में लिया था। पहलवान ने हमसे जो मांगा हमने दिया। 38 दिन से पहलवान धरने पर थे। हम खिलाड़ियों के साथ शुरु से कोऑपरेट कर रहे थे। इंडिया गेट जैसी सेंसिटिव जगह पर कैंडल मार्च की इजाजत दी गई थी, लेकिन अब उन्हें यहां प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।'

पीआरओ ने आगे कहा कि कल नई पार्लियामेंट का उद्घाटन था। उन्हें वहां जाने की इजाजत नहीं थी। बावजूद इसके वे बैरिकेड तोड़कर वहां जाने की कोशिश करते रहे। पहलवानों ने कल बहुत तमाशे किए, इसलिए हिरासत में लिया गया।

बता दें रविवार को संसद भवन के उद्घाटन के दौरान, पहलवानों ने महिला महापंचायत का ऐलान किया था। जब पहलवान संसद की ओर मार्च निकाल रहे थे, इस दौरान पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए प्रदर्शन स्थल से पहलवानों के तंबू हटा दिए थे। साथी ही कई पहलवानों को हिरासत में लेकर उन्हें शहर के तीन अलग-अलग थानों में ले जाया गया था, ताकि तीनों के बीच संपर्क न बन पाए।

इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस ने बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा- 149 (गैरकानूनी विधानसभा), 352 (गंभीर और अचानक उकसावे के अलावा किसी भी व्यक्ति पर हमला करना), 353 (लोक सेवक को डराने के लिए हमला) 147 (उपद्रव करने का दोषी), 188 (महामारी एक्ट) और 186 (लोक सेवक की ड्यूटी में बाधा डालना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।