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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गृह मंत्री अमित शाह का अभिनंदन किया

- ‘1984 के दंगे कोई भी सभ्य व्यक्ति नहीं भूल सकता, जिसमें राजनीतिक इशारे पर नृशंस हत्याएं हुईं’ - मोदी जी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद SIT बनाई और 300 मामलों को दोबारा खोलकर दोषियों को जेल भेजने की शुरुआत की - सिख गुरुओं ने मानवता और देश के लिए जो बलिदान दिया उसकी बराबरी पूरी दुनिया में कोई और नहीं कर सकता- अमित शाह - जब धर्म के लिए जान देने की बारी आती है तो सच्चा सिख कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता, देश को आजादी दिलाने से लेकर देश की सुरक्षा करने तक सबसे ज्यादा बलिदान सिखों ने दिया

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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गृह मंत्री अमित शाह का अभिनंदन किया

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गृह मंत्री अमित शाह का अभिनंदन किया

अनुराग मिश्रा
नई दिल्ली। कोई भी सभ्य व्यक्ति 1984 के दंगे नहीं भूल सकता, ऐसी नृशंस हत्याएं राजनीतिक इशारे पर हुईं। 2014 में मोदी जी की सरकार बनने तक ना तो किसी को अरेस्ट किया गया और ना ही किसी को एक भी दिन की जेल हुई। इस मामले में जांच आयोग गठित किये गए लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।

ये कहना था अमित शाह का जो गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा आयोजित अपने अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मोदी सरकार द्वारा सिख पंथ के लिए किये गये अभूतपूर्व कार्यों के लिये दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने यह कार्यक्रम आयोजित किया।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने SIT बनाई और 300 मामलों को दोबारा खोलकर दोषियों को जेल भेजने की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अभी भी मामले चल रहे हैं और मोदी सरकार पीड़ितों के साथ न्याय ज़रूर करेगी। शाह ने कहा कि मोदी जी ने इतने सालों बाद पहली बार 3,328 पीड़ित परिवारों में से प्रत्येक को 5 लाख रुपए देने और जलियांवाला बाग स्मारक को फिर से गौरवान्वित करने का काम किया है। श्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने 'नागरिकता संशोधन अधिनियम' के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में प्रताड़ित सिख बहनों-भाइयों को नागरिकता देने के रास्ते खोले।

गृह मंत्री ने कहा कि सिख पंथ के अलावा ऐसा शायद ही कोई दूसरा पंथ होगा जिसमें 10 पीढ़ियों तक आक्रांताओं के अन्याय के खिलाफ संघर्ष और बलिदान की इतनी लंबी परंपरा हो। सिख गुरुओं ने मानवता और देश के लिए जो बलिदान दिया है उसकी बराबरी पूरी दुनिया में कोई नहीं कर सकता।

शाह ने कहा कि देश नौवें गुरु तेग बहादुर जी के उपकार को कभी नहीं भुला सकता। कश्मीर में सत्ता के नशे में चूर औरंगजेब के अत्याचार के खिलाफ कश्मीरी पंडितों की अर्ज़ सुनकर वहाँ पैदल चलकर जाना और अपना सर्वोच्च बलिदान देना, केवल गुरु तेग बहादुर जी ही ये कर सकते थे। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने गुरु तेग बहादुर जी की स्मृति में उत्सव मनाने का निर्णय लिया था तब उसके लिए वही स्थान तय किया गया जहां गुरु तेग बहादुर जी की शहीदी की घोषणा हुई थी, उसी दीवार पर उनका गुणगान हुआ और लाल किले पर ही समारोह मनाया गया।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब दुनिया का हर मज़हब अपने-अपने विचारों को लेकर युद्ध लड़ रहा था, उस वक्त गुरु नानक देव जी से लेकर दसवें गुरु तक सभी ने दुनिया को सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया जिस पर आज पूरा विश्व चल रहा है और ये पूरे भारत के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय, धर्म और कर्म को समान रूप से लेकर आगे बढ़ा है। जब धर्म के लिए जान देने की बारी आती है तो सच्चा सिख कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता और देश को आजादी दिलाने से लेकर देश की सुरक्षा करने तक सबसे ज़्यादा बलिदान भी सिखों ने दिया है। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं के उपदेश और उनके बलिदान को देश कभी नहीं भुला सकता।

शाह ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने दुनिया के कई देशों में सर्वधर्म समभाव का संदेश फैलाया। गुरु नानक देव जी ने बिना किसी निजी स्वार्थ के पूरी दुनिया में प्रेम का संदेश फैलाया। गृह मंत्री शाह ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब में ही सबकी अच्छी बातों को समाहित किया गया है और सर्वधर्म समभाव का इससे बड़ा कोई संदेश नहीं हो सकता।

कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने Women-led Development के लिए राज्यों की विधानसभाओं और संसद में मातृशक्ति को 33% आरक्षण दिया है। श्री शाह ने कहा कि मातृ शक्ति को सशक्त करने की परंपरा सिख पंथ में माता खिवी के लंगर की सीख से वर्षों पहले शुरू हुई। उन्होंने कहा कि इतिहास में भी ये दर्ज है कि सिख पंथ से निकली मातृशक्ति ने न केवल आजादी के आंदोलन में हिस्सा लिया बल्कि देश को आगे बढ़ाने में भी बहुत बड़ा योग्दान दिया है।