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सदन में व्यवधान लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीतः उपराष्ट्रपति

- जामिया मिलिया इस्लामिया विवि का शताब्दी वर्ष दीक्षांत समारोह

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सदन में व्यवधान लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीतः उपराष्ट्रपति

सदन में व्यवधान लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीतः उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संसद व विधानसभाओं में व्यवधान व शोरशराबे को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए कहा कि संसद में कामकाज रोकने का कोई बहाना नहीं हो सकता। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि आज लोकतंत्र के मंदिरों में अशांति को हथियार बनाया जा रहा है, जबकि बड़े पैमाने पर लोगों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए ऐसा कभी नहीं होना चाहिए।

धनखड़ ने रविवार को यहां विज्ञान भवन में जामिया मिलिया इस्लामिया शताब्दी वर्ष के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सहमति और असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन असहमति को विरोध में बदलना लोकतंत्र के लिए अभिशाप से कम नहीं है। 'विरोध' प्रतिशोध में नहीं बदलना चाहिए। संवाद और विचार ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। समारोह में धनखड़ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेेंद्र प्रधान व वििव की कुलपति प्रो, नजमा अख्तर की मौजूदगी में विद्यार्थियों को डिग्रियां व पदक प्रदान किए।

उपराष्ट्रपति ने सदनों में कामकाज नहीं होने चिंता जताते हुए कहा कि इस देश के लोग इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं। जब संसद में व्यवधान होता है तो प्रश्नकाल नहीं हो पाता, जबकि प्रश्नकाल शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता उत्पन्न करने का एक तंत्र है। सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य है। जब आप लोकतांत्रिक मूल्यों और सुशासन के संदर्भ में सोचते हैं तो प्रश्नकाल न होने को कभी भी तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता।

धनखड़ ने कहा कि देश आज तेजी से तरक्की कर रहा है। पांच नाजुक अर्थ व्यवस्थाओं से निकलकर भारत शीर्ष पांच अर्थ व्यवस्थाओं में आ गया है। हमारी प्रगति हर किसी को पसंद नहीं आ सकती। संस्थानों और विकास की कहानी को कलंकित और अपमानित करने के लिए कुछ खतरनाक ताकतों के भयावह इरादे हैं। युवाओं को पहल करके ऐसी ताकतों को बेअसर करना होगा। उन्होंने कुछ विदेश विश्वविद्यालयों का जिक्र करते हुए कहा कि ये भारत विरोधी आधारहीन नरेटिव को बढ़ावा देने वाले स्थान बन गए हैं।

विपक्ष पर फिर निशाना

धनखड़ ने किसी विपक्षी नेता का नाम लिए बिना निशाना साधा कि कई लोगों को देश की सेवा करने का मौका मिला और आज वे जब पद पर नहीं हैं तो उन्हें देश की चौतरफा प्रगति नजर नहीं आती। आज भ्रष्टाचार, बिचौलियों और सत्ता के दलालों के लिए कोई जगह नहीं बची तो भ्रष्टाचार में हितधारक एक समूह में एकत्रित हो गए हैं।