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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले DMK और कांग्रेस में कलह, विपक्ष ने जमकर साधा निशाना

एआईएडीएमके महासचिव एडपाडी के. पलनीस्वामी ने ऊटी में टीएनसीसी अध्यक्ष के. सेल्वपेरुन्थगै की निष्ठा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके कांग्रेस के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रही है। पलनीस्वामी ने कहा कि कांग्रेस के अन्य नेता सत्ता साझा करने और आधे सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रहे हैं, जबकि सेल्वपेरुन्थगै इससे इनकार कर रहे हैं।

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तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी। (फोटो- IANS)

एआइएडीएमके महासचिव एडपाडी के. पलनीस्वामी (ईपीएस) ने ऊटी में टीएनसीसी अध्यक्ष के. सेल्वपेरुन्थगै की पार्टी के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि डीएमके कांग्रेस के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रही है।

गुडलूर में प्रचार के दौरान पलनीस्वामी ने कहा, “जब कांग्रेस के अन्य नेता डीएमके से सत्ता साझा करने और 234 विधानसभा सीटों में से आधे पर चुनाव लड़ने की मांग कर रहे हैं, तब सेल्वपेरुन्थगै यह दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सत्ता में हिस्सेदारी की कोई मांग नहीं की।”

ईपीएस ने घेरा

ईपीएस ने कांग्रेस नेता पर साधे निशाने में निजी प्रहार भी किए। इसे इंडिया ब्लॉक में दरार पैदा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

ज्ञात है कि डीएमके गठबंधन में फिलहाल कांग्रेस के अलावा दोनों वामदल, एमडीएमके, वीसीके, आइयूएमएल और कुछ छोटे क्षेत्रीय दल हैं। गठबंधन के नेता के रूप में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सभी को जोड़े रखना चाहते हैं।

ईपीएस ने किया तमिल सम्मान और गरिमा का अपमान

टीएनएससी अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थगै ने ईपीएस पर प्रतिकिया दी, जनता का विश्वास पाना भीख नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव है। हाशिए पर पड़े लोगों द्वारा दिए गए वोट ही मेरी आवाज और राजनीतिक पहचान है। जनता के चुने हुए प्रतिनिधि को भिखारी कहने पर ईपीएस की कड़ी निन्दा करता हूं।

क्या है विवाद

बता दें कि तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कढ़गम) और उसके प्रमुख सहयोगी कांग्रेस के बीच हाल के दिनों में तनाव बढ़ा है। यह कलह मुख्य रूप से 2026 विधानसभा चुनावों से पहले सीट बंटवारे, सत्ता में हिस्सेदारी और कुछ स्थानीय घटनाओं को लेकर उभरा है।

कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरिश चोडांकर और कुछ स्थानीय नेता जैसे एस. राजेशकुमार ने डीएमके से 2026 चुनावों में 234 विधानसभा सीटों में से 117 (यानी आधी) सीटें और गठबंधन सरकार में हिस्सेदारी की मांग की है।

डीएमके ने इन मांगों को खारिज कर दिया है, जिससे तनाव बढ़ा। 2021 चुनावों में कांग्रेस को डीएमके ने सिर्फ 25 सीटें दी थीं, जिनमें से 18 जीतीं। अब कांग्रेस अपनी ताकत बढ़ाने के लिए ज्यादा हिस्सा चाहती है।