
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फोटो- ANI)
ईरान युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने ट्रंप के संदेश को सार्वजनिक किया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ हमारे अद्भुत संबंध भविष्य में और भी मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी और मैं, हम दो ऐसे लोग हैं जो काम करके दिखाते हैं। ऐसी बात ज्यादातर लोगों के बारे में नहीं कही जा सकती।
बता दें कि ईरान युद्ध अभी तक पूरे जोरों से चल रहा है। हालांकि, ट्रंप इसे रोकने की हर कोशिश में जुटे हैं। उन्होंने शुक्रवार को ईरान के लिए एक और बड़ी घोषणा कर दी है।
ट्रंप ने कहा है कि अगले 10 दिनों तक ईरान के ऊर्जा प्लांटों पर कोई हमला नहीं होगा। उन्होंने पहले केवल पांच दिनों तक ईरान में ऊर्जा प्लांटों पर हमला नहीं करने की घोषणा की थी, जिसे अब उन्होंने बढ़ा दिया है।
उधर, ईरान की ओर से युद्ध में कोई नरमी देखने को नहीं मिल रही है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को ईरान में नागरिक बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों के लिए अमेरिका और इजराइल की कड़ी आलोचना की। इन हमलों में सबसे ज्यादा नुकसान मीनाब एलिमेंट्री गर्ल्स स्कूल को हुआ, जहां 160 से ज्यादा लोगों की जान चली गई।
इन हरकतों को 'युद्ध अपराध' बताते हुए उन्होंने दुनिया से अपील की कि वे ईरान के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ एकजुट हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक जरूरत होगी, ईरान अपनी रक्षा करता रहेगा।
अराघची ने कहा- अन्याय के सामने उदासीनता और चुप्पी से न तो सुरक्षा मिलेगी और न ही शांति। इससे और ज्यादा असुरक्षा और मानवाधिकारों का उल्लंघन ही बढ़ेगा। संयुक्त राष्ट्र और उसके मूल सिद्धांत, साथ ही मानवाधिकारों का पूरा ढांचा, आज गंभीर खतरे में है।
उन्होंने आगे कहा- आप सभी को इन हमलावरों की निंदा करनी चाहिए और उन्हें यह बता देना चाहिए कि दुनिया के सभी देश और पूरी मानवता की सामूहिक चेतना, ईरानियों के खिलाफ किए जा रहे इन घिनौने अपराधों के लिए उन्हें ही जवाबदेह ठहराएगी।
विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भले ही ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा है, फिर भी जब तक जरूरत होगी, वह अपनी रक्षा करता रहेगा। उन्होंने स्कूल पर हुए हमले को सोचा-समझा और जान-बूझकर किया गया हमला बताते हुए उसकी कड़ी निंदा की।
उन्होंने कहा कि यह हमला तब हुआ, जब अमेरिका और इजराइल के पास अत्याधुनिक तकनीक और सैन्य डेटा सिस्टम मौजूद थे। उन्होंने आगे कहा- इस अत्याचार को न तो सही ठहराया जा सकता है, न ही इसे छिपाया जा सकता है; और न ही इसके प्रति चुप्पी या उदासीनता बरती जानी चाहिए।
Updated on:
27 Mar 2026 06:15 pm
Published on:
27 Mar 2026 06:05 pm
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