
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ( File Photo - IANS)
Economic Crisis : देश में क्या कोई नया आर्थिक संकट आने वाला है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से 'कम सोना खरीदने' की अपील की है। इस अपील पर सियासत गरमा गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है और देश की असली आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ओवैसी का कहना है कि देश में बेवजह का आर्थिक संकट बताया जा रहा है।
ओवैसी ने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि राज्यों के पास सोने का भंडार रहे और व्यापार डॉलर में हो। उन्होंने याद दिलाया कि 1991 में भुगतान संतुलन के संकट के कारण भारत को अपना 47 टन सोना गिरवी रखकर लंदन भेजना पड़ा था। लेकिन आज 2026 में हालात अलग हैं। भारत वही सोना लंदन से वापस ला रहा है। ऐसे में जनता से त्याग करने को क्यों कहा जा रहा है?
हैदराबाद के सांसद ने आंकड़ों का हवाला देते हुए पूछा कि जब भारत के पास 691 अरब अमेरिकी डॉलर का भारी-भरकम विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, तो देश को किस बात की चिंता सता रही है? उन्होंने बताया कि 2025 के आखिरी महीनों में ही भारत ने बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स से अपना 104 टन सोना वापस देश मंगाया है। जब हमारे पास सोने का इतना विशाल भंडार है, तो प्रधानमंत्री की ऐसी अपील बेहद चौंकाने वाली लगती है।
ओवैसी ने सीधा आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार देश और अर्थव्यवस्था की असली और कड़वी सच्चाई को जनता से छिपा रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सरकार ने अपनी आर्थिक उपलब्धियों का बहुत बखान किया और एक्साइज ड्यूटी भी घटाई थी। लेकिन अब चुनाव बीत जाने के बाद, अर्थव्यवस्था का सारा बोझ आम जनता के कंधों पर डाला जा रहा है। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को 'देशभक्ति' के आवरण में लपेटकर पेश कर रही है, जिसे किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।
असदुद्दीन ओवैसी की इस प्रतिक्रिया ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक नया हथियार दे दिया है। ओवैसी का यह बयान दर्शाता है कि विपक्ष अब सरकार की आर्थिक नीतियों, विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी बहस का विषय बन गया है कि क्या वाकई अर्थव्यवस्था की कोई अंदरूनी सच्चाई है जिसे बताया नहीं जा रहा है।
इस बयान के बाद अब सबकी नजरें वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक की प्रतिक्रिया पर होंगी। सरकार या अर्थशास्त्रियों की तरफ से यह स्पष्टीकरण आ सकता है कि सोना आयात करने से देश का चालू खाता घाटा बढ़ता है, इसलिए सोने की खपत कम करने की अपील एक वृहद आर्थिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
बहरहाल,भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। हर साल अरबों डॉलर सिर्फ सोना खरीदने में विदेश चले जाते हैं, जिससे रुपये की कीमत पर दबाव पड़ता है। पीएम मोदी की अपील का अहम पहलू यह है कि सरकार चाहती है कि लोग भौतिक सोने के बजाय डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या शेयर बाजार में निवेश करें, ताकि वह पैसा देश के विकास और अर्थव्यवस्था के काम आ सके।
Updated on:
12 May 2026 03:41 pm
Published on:
12 May 2026 03:38 pm
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