इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। एजेंसी का दावा है कि I-PAC ने कथित रूप से अपराध की कमाई को कई स्तरों के जरिए घुमाकर वैध रूप देने की कोशिश की। सूत्रों के मुताबिक, जांच में फर्जी बिल और चालान, बिना किसी व्यावसायिक आधार के असुरक्षित लोन, और तीसरे पक्ष के जरिए धन प्राप्त करने जैसे कई तरीके सामने आए हैं। इसके अलावा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क के जरिए नकदी के लेन-देन का भी आरोप लगाया गया है। ED का कहना है कि तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं एजेंसी के अनुसार, निदेशक के तौर पर वे इन गतिविधियों के लिए जिम्मेदार हैं, चाहे वह सहमति, मिलीभगत या लापरवाही के कारण ही क्यों न हो।