
Patrika Group Editor-in-Chief Gulab Kothari: हमें आज पता ही नहीं कि हमारे जीवन के दो हिस्से हैं। एक हिस्सा आत्मा का और दूसरा हिस्सा शरीर का है। पढ़-लिखकर जो इंजीनियर-डॉक्टर बनेगा, वो शरीर बनेगा या मेरी आत्मा को मुझे बनाना है? शिक्षित मुझे किसे करना है? ये प्रश्न सबसे बड़ा है। आज की शिक्षा ने हमें यह सिखाया कि अच्छा पैकेज ही जरूरी है। इंसान जरूरी नहीं, इंसान की मदद करना भी जरूरी नहीं है। बस अच्छा पैकेज चाहिए। कभी आपने कागज पर लिखकर सोचा कि अच्छा पैकेज क्यों चाहिए? कभी सोचा कि मुझे वास्तव में कितने रुपए मिल जाएंगे तो मैं ईमानदारी से काम करूंगा या करूंगी? यह बात पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने सेज यूनिवर्सिटी में आयोजित 'दिशा बोध' कार्यक्रम में युवतियों से संवाद करते हुए कही। उन्होंने जिंदगी, लक्ष्य, मन, आत्मा, शिक्षा जैसे विभिन्न विषयों पर युवाओं को नई दिशा दी।
कोठारी ने कहा कि आज हमें 3 लाख का पैकेज मिल रहा है, तो भी हमें 4 लाख की जरूरत है। हमें उस 3 लाख रुपए में भी सुख महसूस नहीं हो रहा है जो हाथ में आ रहे हैं। हम 4 लाख के पीछे भाग रहे हैं। हमने कई साल, कई महीने तक रुपए जोड़ स्कूटर खरीदा फिर दिमाग में आया कि अगले साल कार लेनी है। फिर कार की हमने इतनी चिंता कि स्कूटर का स्वाद ही नहीं लिया। इन चीजों के बारे में हमें चिंतन-मनन की जरूरत है।
कोठारी ने कहा कि हम आज एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां हम केवल दौड़ रहे हैं। न तो हम रुकना चाहते हैं, न हम विश्राम करना चाहते हैं, न ठहर के यह सोचना चाहते हैं कि क्या होगा इस दौड़ से। मुझे लगता है कि सारे प्रश्न अभी हमारे मन में अधूरे हैं। आज भी मैं जब किसी पढ़ाई करने वाले से पूछता हूं, क्या बनना चाहते हो? क्यों बनना चाहते हो? कहां पहुंचना चाहते हो और क्यों? बहुत आसान नहीं होता है इसका उत्तर दे पाना। जब तक हम यहां हैं, हमें तय करना होगा कि मुझे यहां से निकलकर क्या करना है। अभी वो प्रश्न आपके दिमाग में क्लियर ही नहीं है।
कार्यक्रम में सेज यूनिवर्सिटी इंदौर-भोपाल के चांसलर इंजीनियर संजीव अग्रवाल ने कहा कि आज दुनिया में बहुत कम लोग हैं, जिन्हें वेद और उपनिषद का गुलाब कोठारी जितना ज्ञान है। यह ज्ञान युवाओं तक पहुंचना चाहिए।
Published on:
15 Feb 2025 08:11 am
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