
मिर्गी के इलाज की दवा (Representational Photo)
मिर्गी (Epilepsy) के इलाज में भोपाल के चिकित्सा वैज्ञानिकों को एक नया रास्ता मिला है। प्राचीन यूनानी चिकित्सा में मिर्गी के उपचार के लिए जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता था। भोपाल के चिकित्सा वैज्ञानिकों ने उन्हीं जड़ी-बूटियों पर रिसर्च करते हुए एक विशेष नेज़ल स्प्रे विकसित किया है। इस स्प्रे को आधुनिक 'नोज़-टू-ब्रेन ड्रग डिलीवरी' तकनीक के माध्यम से नाक के रास्ते सीधे मस्तिष्क तक पहुंचाया जाएगा।
मिर्गी के इलाज की दवा के शोधकर्ता हकीम सैयद जियाउल हसन और यूनानी मेडिकल कॉलेज के 'मोआलेजात' विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अब्बास जैदी के अनुसार इससे जड़ी-बूटियों के औषधीय तत्व मस्तिष्क के प्रभावित हिस्सों तक ज़्यादा प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगे और उपचार की प्रभावशीलता बढऩे की संभावना है। उनका दावा है कि इस नई दवा के दुष्प्रभाव या तो नहीं होंगे या बहुत कम होंगे।
तीन वर्षीय यह रिसर्च आयुष मंत्रालय के केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद के सहयोग से किया जा रहा है। इनका नया फॉर्मूलेशन तैयार कर चूहों पर सफल टॉक्सिसिटी परीक्षण पूरा किया जा चुका है। फिलहाल चूहों पर इसकी प्रभावशीलता पर रिसर्च चल रही है। इसके सफल होने पर मनुष्यों पर क्लीनिकल ट्रायल किए जाएंगे।
मिर्गी मस्तिष्क से जुड़ा एक तंत्रिका संबंधी रोग है, जिसमें बार-बार दौरे पड़ते हैं। मस्तिष्क में असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण बार-बार दौरे पड़ते हैं। ये दौरे कुछ सेकंड से मिनटों तक रह सकते हैं। लक्षणों में बेहोशी, शरीर का कांपना, मुंह से झाग आना, आंखें घूमना या अचानक खाली निगाहें शामिल हो सकती हैं। मिर्गी के कारण आनुवंशिक हो सकते हैं, या सिर की चोट, मस्तिष्क संक्रमण, ट्यूमर, स्ट्रोक अथवा जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी से हो सकते हैं। कभी-कभी कारण अज्ञात भी रहता है। गंभीर मामलों में सर्जरी या अन्य थेरेपी की जाती है। नियमित दवा, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण से जीवन सामान्य रह सकता है। सामान्य तौर पर मिर्गी के मरीज दवाओं से नियंत्रित रहते हैं, लेकिन कुछ मरीजों को लंबे समय तक दवा लेने की आवश्यकता होती है। ऐसे में कम दुष्प्रभाव वाले नए उपचार विकल्पों पर लगातार रिसर्च की जा रही है।
Updated on:
01 Aug 2026 04:28 am
Published on:
01 Aug 2026 04:28 am
