
फेक करेंसी का रैकेट एक्सपोज (IANS)
Fake Currency Racket: भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने बाजार में नकली मुद्रा के फैलाव को लेकर चेतावनी जारी की है। पहले नकली नोट पाकिस्तान से नेपाल होते हुए भारत में प्रवेश करते थे, लेकिन नेपाल सीमा पर कड़ी निगरानी के बाद अब इस रैकेट का फोकस पश्चिम बंगाल के मालदा जिले पर शिफ्ट हो गया है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में सामने आया है कि मालदा में कई यूनिट्स सक्रिय हैं। ये यूनिट्स नकली नोट बनाने के लिए आवश्यक सामग्री पाकिस्तान से बांग्लादेश के रास्ते मंगवाती हैं। इसके बाद नकली नोट छापकर बाजार में फैलाए जाते हैं। एक खुफिया अधिकारी के मुताबिक, अब इस रैकेट के संचालन वाले क्षेत्र लगातार बढ़ रहे हैं। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और नदिया जिले भी इस रैकेट के नए हॉटस्पॉट बन गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इस रैकेट के अन्य प्रमुख केंद्र हैं –
पश्चिम बंगाल के अलावा, नकली नोट अब दुबई से भी भारत में पहुंच रहे हैं, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों में।
अधिकारियों का कहना है कि इस नकली मुद्रा नेटवर्क को भारत में अभी भी दाऊद इब्राहिम सिंडिकेट नियंत्रित करता है। आईएसआई ने इस सिंडिकेट को उत्पादन बढ़ाने और पूरे भारत में रैकेट फैलाने के निर्देश दिए हैं। यही कारण है कि नकली नोट पकड़े जाने के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
प्रवेश बिंदुओं के बढ़ने के साथ, सिंडिकेट अब सोशल मीडिया पर भी भारी निर्भर है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र के मालकापुर में नकली नोट के लेन-देन की डीलें सोशल मीडिया के माध्यम से की जाती हैं। इसके अलावा, पुणे और भिवंडी भी प्रमुख व्यापार केंद्र बन गए हैं। नोट को असली जैसा दिखाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जा रहा है। AI तकनीक का उपयोग नकली नोट को सही तरीके से छापने और कानून प्रवर्तन से बचने के लिए किया जाता है।
नकली नोट छापने की अधिकांश सामग्री पाकिस्तान से आती है। सिंडिकेट मुख्य रूप से Pakistan Security Printing Corporation (PSPC), कराची पर निर्भर है। अब वे चीनी कागज का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जो एजेंसियों के लिए नई चुनौती है।
अधिकारियों का कहना है कि यह रैकेट आईएसआई की रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचना है। पश्चिम बंगाल के अलावा आंध्र प्रदेश के वेस्ट गोडावरी और ईस्ट गोडावरी जिले भी इस नेटवर्क के प्रमुख केंद्र बन गए हैं। यह रणनीति क्षेत्र-विशेष है, ताकि यूनिट्स के बीच संपर्क न्यूनतम रहे और पकड़े जाने का जोखिम कम हो।
Published on:
27 Mar 2026 12:15 pm
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