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कांस्टेबल से डीएसपी बनीं बिहार की बबली, मां की ममता और सिपाही की कठिन ड्यूटी के बीच ऐसे हासिल की सफलता

सात महीने की बच्ची और सिपाही की कठिन ड्यूटी के बाद भी बिहार पुलिस की एक लेडी कांस्टेबल ने डीएसपी की कठिन परीक्षा पास की है। इस लेडी कांस्टेबल का संघर्ष और उनको मिली सफलता पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। पढ़िए पूरी कहानी...                    

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Female Constable Babli Became DSP in Begusarai Seeing struggle SP Honored her

यदि आप कुछ करने की ठान लेते हैं और फिर उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार मेहनत करते रहते हैं तो सफलता जरूर हाथ लगती है। कठिन संघर्ष से ही कामयाबी की राह निकलती है। इस उक्ति को आज सही मायनों में चरितार्थ किया है बिहार पुलिस की एक लेडी कांस्टेबल ने। सिपाही की कठिन ड्यूटी के साथ-साथ मां की ममता का फर्ज निभाते हुए यह कांस्टेबल डीएसपी की कठिन परीक्षा को पास कर अब बिहार पुलिस में अधिकारी बनने जा रही हैं।

परिश्रम के दम पर कामयाबी के शिखर को छूने वाली बिहार पुलिस की इस लेडी कांस्टेबल का नाम बबली हैं। बबली बेगूसराय पुलिस लाइन में तैनात थी। जहां से उन्होंने ड्यूटी के साथ-साथ पढ़ाई करते हुए डीएसपी की परीक्षा में सफलता के झंडे गांड़े। अब बबली को डीएसपी के प्रशिक्षण के लिए भेजा जा चुका है। प्रशिक्षण पर जाने से पहले बेगूसराय एसपी ने अपने कार्यालय में बबली को सम्मानित किया।


सिपाही से डीएसपी बनी बबली को राजगीर प्रशिक्षण केंद्र के लिए विरमित करने के पूर्व बेगूसराय एसपी योगेंद्र कुमार ने सम्मानित किया। इस दौरान बेगूसराय की एसपी योगेंद्र कुमार ने कहा कि जिला बल की होनहार सिपाही ने ड्यूटी के बाद समय निकाल कर न सिर्फ अपना सपना साकार किया है बल्कि उन्होंने सहकर्मियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है। बबली की कहानी कई लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

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इधर बबली ने अपनी जर्नी के बारे में बताया कि उसने 2015 में खगड़िया में बतौर कांस्टेबल अपनी नौकरी की शुरुआत की थी। कांस्टेबल की नौकरी के साथ-साथ मुझे पढ़ने का शौक था। इसलिए मैंने अपनी पढ़ाई और तैयारी जारी रखी। तीसरे प्रयास में मुझे डीएसपी की परीक्षा में सफलता हाथ लगी। बबली ने बताया कि बचपन से परिवार की आर्थिक परेशानी ने मुझे हमेशा मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।


बबली अपने घर की बड़ी बेटी हैं। बोध गया के भागलपुर निवासी रोहित कुमार से बबली की शादी हुई थी। अभी बबली को सात माह की एक बच्ची है। जिसे गोद में लेकर वो सम्मान समारोह में आई थी। बबली की सफलता से न केवल उसके पति, पिता बल्कि उसके साथ काम करने वाले अन्य जवान भी काफी खुश दिखे।


एसपी योगेंद्र कुमार ने कहा कि जिला बल की होनहार सिपाही ने ड्यूटी के बाद समय निकाल कर न सिर्फ अपना सपना साकार किया है बल्कि उन्होंने सहकर्मियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है। बबली ने बताया कि घर की बड़ी बेटी के दायित्व के निर्वहन के लिए उन्होंने सरकारी नौकरी का प्रयास किया और 2015 में कांस्टेबल पद पर चयनित हुई थी।