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बंगाल चुनाव का पहला चरणः साफ-सुथरी छवि पर भारी ‘जीतने की काबिलियत’, 43% सीटें ‘रेड अलर्ट’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Elections) के पहले चरण में साफ-सुथरी छवि वाले प्रत्याशी बेहद कम हैं। पहले चरण में BJP के 70%, तृणमूल के 43%, CPI(M) के 44% और कांग्रेस के 26% उम्मीदवारों पर आपराधिक केस दर्ज हैं।

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भारत

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Vinay Shakya

Apr 19, 2026

Amit Shah, Mamata Banerjee and Rahul Gandhi

बंगाल चुनाव के पहले चरण में BJP, TMC, कांग्रेस और CPI(M) के उम्मीदवारों को आपराधिक केस (File Photo)

West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण ने लोकतांत्रिक गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, 152 सीटों में से 43% 'रेड अलर्ट' वाली हैं, जहां 3 या उससे अधिक उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले हैं।

कुल 23% प्रत्याशी दागी

ADR और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 23% प्रत्याशियों ने अपने खिलाफ केस घोषित किए हैं। यह तस्वीर बताती है कि राजनीतिक दलों की रणनीति में 'जीतने की काबिलियत' साफ-सुथरी छवि पर भारी पड़ रही है। ऐसे में मतदाताओं के सामने विकल्प सीमित होते दिख रहे हैं, जिससे चुनावी पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व की गुणवत्ता पर बहस तेज हो गई है। आंकड़े बता रहे हैं कि असली परीक्षा मतदाता की है, जो छवि, संसाधन और जीत की संभावना के बीच संतुलन तलाश रहा है।

प्रत्याशियों की आपराधिक स्थिति के आंकड़े

  • कुल उम्मीदवार- 1475
  • आपराधिक केस- 345 (23%)
  • गंभीर केस- 294 (20%)
  • हत्या/प्रयास केस- 19 /105
  • महिलाओं के खिलाफ अपराध- 98
  • करोड़पति उम्मीदवार- 309 (21%)
  • औसत संपत्ति-1.34 करोड़
  • 10 करोड़ संपत्ति वाले उम्मीदवार- 35
  • देनदारियों वाले उम्मीदवार- 539 (37%)
  • रेड अलर्ट सीटें- 66 (43%)
  • महिला उम्मीदवार- 167 (11%)

विनिंग एबिलिटी को प्राथमिकता

पहले चरण के आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि दल टिकट वितरण में 'जीतने की की काबिलियत' को प्राथमिकता दे रहे हैं। 23% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले और 20% पर गंभीर आरोप हैं, जिनमें हत्या (19) और हत्या के प्रयास (105) जैसे केस शामिल हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध के 98 मामलों का होना भी चिंता बढ़ाता है। पार्टीवार देखें तो भाजपा के 70%, तृणमूल के 43%, CPI(M) के 44% और कांग्रेस के 26% उम्मीदवारों पर केस हैं। 66 सीटों का 'रेड अलर्ट' होना दर्शाता है कि कई क्षेत्रों में मतदाताओं के पास स्वच्छ छवि वाले विकल्प बेहद सीमित हैं।