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फोर्ड की भारत में वापसी: चेन्नई प्लांट में 3,250 करोड़ का निवेश, मिलेंगी 600 से अधिक नौकरियां

Ford's return to India: 2029 में उत्पादन शुरू होने पर इस संयंत्र की वार्षिक क्षमता 2,35,000 इंजन होने की उम्मीद है। इससे 600 से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियों के साथ-साथ सैकड़ों अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

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Fords return to India

फोर्ड की भारत में वापसी (फाइल फोटो)

Fords return to India: अमेरिकी ऑटो दिग्गज फोर्ड मोटर कंपनी ने चार साल बाद भारत में विनिर्माण की वापसी का ऐलान किया है। कंपनी चेन्नई के मरईमलई नगर प्लांट को पुनर्जीवित करेगी और 3,250 करोड़ रुपये निवेश कर अगली पीढ़ी की पावरट्रेन सुविधा स्थापित करेगी। यह सुविधा वैश्विक बाजारों के लिए उन्नत इंजन बनाएगी। महामारी के बाद विदेशी ऑटोमेकर्स की निकासी के दौर में यह सबसे बड़ा नया निवेश माना जा रहा है।

600 से अधिक सीधी नौकरियां

प्रोजेक्ट से 600 से अधिक सीधी नौकरियां सृजित होंगी, साथ ही आपूर्तिकर्ताओं और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में सैकड़ों अप्रत्यक्ष रोजगार आएंगे। फोर्ड ने 2021 में भारत में वाहन उत्पादन बंद कर दिया था, लेकिन तमिलनाडु में तकनीकी और बैक-ऑफिस कार्य जारी रखे, जहां 12,000 लोग कार्यरत हैं।

एमओयू पर हस्ताक्षर

शुक्रवार को कंपनी ने घोषणा की कि सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अमेरिका यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित लेटर ऑफ इंटेंट को औपचारिक रूप दिया गया है। तमिलनाडु सरकार के साथ एमओयू साइन हुआ है। फोर्ड के अंतरराष्ट्रीय बाजार समूह के अध्यक्ष जेफ मारेंटिक ने कहा, 'चेन्नई प्लांट फोर्ड के वैश्विक नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत की विनिर्माण क्षमता का लाभ उठाएंगे।'

2029 से उत्पादन शुरू

नई सुविधा में सभी नई तकनीक वाले इंजन बनेंगे। वार्षिक क्षमता 235,000 इंजन होगी। उत्पादन 2029 में शुरू होगा। साइट तैयारी इस साल बाद में शुरू होगी। मौजूदा भारतीय इंजन सुविधा को पूरक बनाते हुए यह प्लांट निर्यात-केंद्रित होगा।

तमिलनाडु सरकार का स्वागत

उद्योग मंत्री टीआरबी राजा ने इसे राज्य की औद्योगिक जलवायु में विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, 'फोर्ड की वापसी तमिलनाडु के पुनर्जागृत ऑटोमोटिव सेक्टर को ऊर्जा देगी।' राज्य कुशल कार्यबल, बुनियादी ढांचे और निवेशक-अनुकूल नीतियों पर जोर दे रहा है।

भारत में फोर्ड का इतिहास

फोर्ड ने 1996 में भारत में विनिर्माण शुरू किया था। 2021 में घाटे और रणनीतिक पुनर्गठन के कारण चेन्नई और गुजरात प्लांट बंद किए। अब केवल निर्यात-आधारित मॉडल पर फोकस है। घरेलू यात्री वाहन बाजार में वापसी की कोई योजना नहीं है।