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G-7 Summit 2026: फ्रांस में बजेगा भारत का डंका, पीएम नरेंद्र मोदी को मिला खास न्योता

फ्रांस में जून 2026 में होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष आमंत्रण मिला है। भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, मध्य पूर्व तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और भारत-फ्रांस साझेदारी इस बैठक के मुख्य मुद्दे रहेंगे।

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भारत

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Anurag Animesh

Mar 27, 2026

PM Narendra Modi

PM Narendra Modi(Image-ANI)

G-7 Summit 2026: जून का महीना आते-आते एक बार फिर दुनिया की नजरें यूरोप पर टिकने वाली हैं। वजह है जी-7 शिखर सम्मेलन, जिसकी मेजबानी इस बार फ्रांस कर रहा है। लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ सात देशों तक सीमित नहीं रहने वाली, क्योंकि भारत भी इस बड़े मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने जा रहा है। फ्रांस सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को इस बैठक में विशेष आमंत्रण दिया गया है, और उन्होंने इसे स्वीकार भी कर लिया है। यह सम्मेलन 15 से 17 जून के बीच फ्रांस के एवियन में होगा। यह कोई पहली बार नहीं है जब भारत को जी-7 में बुलाया गया हो, लेकिन हर बार इसकी अहमियत और बढ़ जाती है।

G-7 Summit 2026: जानें डिटेल्स


दरअसल, पेरिस में हाल ही में जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों की एक बैठक चल रही थी। इससे इतर फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noel Barrot और भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar के बीच खास बातचीत हुई। इसी मुलाकात में पीएम मोदी की भागीदारी पर औपचारिक सहमति जताई गई। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पहले ही मोदी को निमंत्रण दे चुके थे, और अब इस पर मुहर भी लग चुकी है। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका कितनी अहम हो चुकी है।

बैठक में क्या हुई बातें


इस समय भारत ब्रिक्स जैसे बड़े समूह की अध्यक्षता भी कर रहा है। ऐसे में जी-7 जैसे मंच पर भारत की मौजूदगी और भी मायने रखती है। खासकर तब, जब दुनिया आर्थिक असंतुलन, युद्ध और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रही हो। बैठक में सिर्फ औपचारिक बातें नहीं हुईं। असली चर्चा मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर हुई। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित संघर्ष ने दुनिया को चिंता में डाल रखा है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। अगर यहां कोई बाधा आती है, तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

पीएम मोदी फ्रांस जाएंगे


भारत और फ्रांस दोनों ने इस मुद्दे पर एक जैसी सोच दिखाई। दोनों देशों ने साफ कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते की सुरक्षा के लिए मिलकर काम किया जाएगा। यह सिर्फ रणनीतिक सहयोग नहीं है, बल्कि एक तरह से वैश्विक स्थिरता बनाए रखने की कोशिश भी है। अब जब प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस जाएंगे, तो यह दौरा कई मायनों में खास होगा। एक तरफ भारत-फ्रांस रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी, तो दूसरी तरफ भारत की छवि एक ऐसे देश के रूप में और मजबूत होगी जो वैश्विक मुद्दों पर निर्णायक भूमिका निभा सकता है।