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Gautam Adani case: अमेरिका में गौतम अडानी मामले पर हरिश साल्वे ने बाइडेन प्रशासन पर उठाए सवाल

Adani criminal case: अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक मामला वापस लेने के फैसले पर एडवोकेट विजय अग्रवाल और सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे की प्रतिक्रिया सामने आई है।
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Gautam Adani case

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US Justice Department: उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) के खिलाफ आपराधिक मामला वापस लेने के अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के फैसले को लेकर वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। एडवोकेट विजय अग्रवाल और सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे (Harish Salve) ने इस फैसले पर अपनी-अपनी कानूनी राय रखते हुए कहा कि उपलब्ध एविडेंस मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त नहीं थे और मामले की बुनियाद ही कमजोर थी।

सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे का दावा

सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल में भारत विरोधी नैरेटिव लगातार देखने को मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के कुछ सीनेटर लगातार भारत के खिलाफ बयानबाजी करते रहे और विभिन्न माध्यमों से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करते रहे।

नेम एंड शेम रणनीति के तहत मामला दायर

साल्वे ने कहा कि यह भी आरोप लगाया गया है कि यह मामला केवल नेम एंड शेम (Name and Shame) रणनीति के तहत दायर किया गया था, जिसका उद्देश्य आरोप लगाकर सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना था, जबकि मामले को वास्तविक ट्रायल तक ले जाने की मंशा नहीं थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब अदालत इस मामले को औपचारिक रूप से बंद करने का निर्णय ले सकती है।

शुरुआत से ही मजबूत मामला नहीं था-विजय अग्रवाल

एडवोकेट विजय अग्रवाल ने कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग के अपने आकलन के अनुसार शुरुआत से ही यह मामला ठोस आधार पर खड़ा नहीं था। उन्होंने बताया कि DOJ का मानना है कि शुरुआती अनुमान की तुलना में उपलब्ध सबूत काफी कमजोर निकले और सबसे जरुरी बात यह रही कि किसी भी प्रकार के वास्तविक वित्तीय या कानूनी नुकसान का कोई प्रमाण सामने नहीं आया।

साथ ही उन्होंने कहा कि जब किसी मामले में पर्याप्त एविडेंस और नुकसान का स्पष्ट प्रमाण नहीं होता, तब मुकदमा जारी रखने का आधार स्वतः कमजोर पड़ जाता है। अग्रवाल के अनुसार, कानूनी व्यवस्था में यह पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया है। अदालत स्वयं किसी मामले में मुकदमा शुरू नहीं करती और न ही उसे आगे बढ़ाती है। अदालत केवल तभी सुनवाई करती है, जब अभियोजन पक्ष मुकदमा चलाने का निर्णय लेता है। ऐसे में इस मामले में 'पर्याप्त सबूतों का अभाव' और कोई वास्तविक नुकसान नहीं जैसे तथ्य निर्णायक साबित हुए।

क्या है पूरा मामला?

गौतम अडानी से जुड़े इस मामले में अमेरिकी न्याय विभाग के रुख में आए बदलाव के बाद कानूनी और कारोबारी हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मुकदमा पक्ष खुद पर्याप्त एविडेंस और नुकसान का प्रमाण पेश करने में असफल रहता है, तो किसी भी आपराधिक मुकदमे को आगे बढ़ाना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जाता।

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