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Instagram Child Abuse Content: सोशल मीडिया पर बाल यौन शोषण सामग्री पर सरकार सख्त, SOP पालन अनिवार्य

India social media regulations: इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। केंद्र सरकार ने अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मनमानी पर लगाम कसने के लिए अपनी सबसे सख्त गाइडलाइंस (SOP) को लागू करने का अल्टीमेटम दे दिया है।
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भारत

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Manoj Vashisth

Jul 14, 2026

Instagram Child Abuse Content

Instagram Child Abuse Content : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सरकार का सख्त संदेश, CSAM रोकने के नियमों का करें कड़ाई से पालन (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

MeitY Meta Notice: इंटरनेट और सोशल मीडिया की दुनिया में हमारे बच्चों का भविष्य कितना सुरक्षित है? यह सवाल एक बार फिर देश के सबसे बड़े नीतिगत गलियारों में गूंज रहा है। केंद्र सरकार ने अब साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों से जुड़े यौन शोषण और आपत्तिजनक कंटेंट (CSAM) के मामले में निर्धारित 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) का हर हाल में कड़ाई से पालन करना होगा। सरकार ने टेक कंपनियों को चेतावनी दी है कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसा होने पर कानूनी डंडा चलना तय है।

यह सख्त रुख तब सामने आया है जब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़े संवेदनशील और आपत्तिजनक विज्ञापनों को बढ़ावा देने के आरोपों पर मेटा (Meta) के जवाब की समीक्षा कर रहा है। दरअसल, कुछ समय पहले ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन दिख रहे हैं जो बच्चों के शोषण से जुड़े कंटेंट तक पहुंच आसान बनाते हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए मेटा को नोटिस थमाकर उनके एड-रिव्यू सिस्टम और कंटेंट मॉडरेशन प्रोसेस पर जवाब मांगा था।

आईटी सचिव एस. कृष्णन ने पुष्टि की है कि मेटा का जवाब मिल चुका है और उसका गहन आकलन करने के बाद ही सरकार अपनी अगली कार्रवाई तय करेगी। हालांकि, अधिकारियों का मुख्य फोकस इस बात पर है कि क्या इन प्लेटफॉर्म्स ने ऐसे कंटेंट को रोकने, उसकी रिपोर्ट करने और उसे हटाने की अपनी बुनियादी कानूनी जिम्मेदारियों को निभाया या नहीं।

कानूनी शिकंजा और I4C की भूमिका

भारत में काम कर रहे किसी भी डिजिटल मध्यस्थ (Intermediary) के लिए अब यह अनिवार्य है कि वे ऐसे मामलों की तुरंत रिपोर्ट करें। इसके लिए उन्हें 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (I4C) जैसी नामित संस्थाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) के साथ मिलकर रियल-टाइम में काम करना होगा। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम, 2021 के तहत अगर कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो वह कानून के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (Safe Harbor) सुरक्षा खो सकता है, जिसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद किसी भी अवैध कंटेंट के लिए कंपनी पर सीधे आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है।

इनसाइड स्टोरी: क्यों गहरी है यह चिंता?

यह पहली बार नहीं है जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में हैं। वैश्विक स्तर पर भी मेटा, टिकटॉक और एक्स (X) जैसी कंपनियों पर यह आरोप लगते रहे हैं कि उनके एल्गोरिदम बच्चों को सुरक्षित माहौल देने में नाकाम रहे हैं।

साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक कंपनियों के ऑटोमेटेड एआई (AI) फिल्टर्स अक्सर स्थानीय भाषाओं या कोडवर्ड में शेयर किए जा रहे आपत्तिजनक कंटेंट को पकड़ने में विफल हो जाते हैं। इसके लिए कंपनियों को मानव मॉडरेशन (Human Moderation) बढ़ाने की सख्त जरूरत है।

बढ़ता खतरा: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और विभिन्न साइबर सेल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में बच्चों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन ग्रूमिंग और साइबर स्टॉकिंग के मामलों में तेजी से उछाल आया है।

सरकार की इस ताजा सख्ती ने टेक जगत में खलबली मचा दी है। अब देखना यह होगा कि मेटा के जवाब से संतुष्ट न होने पर क्या सरकार इस सोशल मीडिया दिग्गज पर कोई बड़ा जुर्माना या प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करती है।